Adhi Vinayaka Temple : ‘नरमुखी गणेश प्रतिमा’ अद्भुत है मंदिर का रहस्य

0 193

धर्म / आध्यात्म। भारत में 10 सितंबर से गणेश उत्सव शुरु हो गया है। इस दौरान घर-घर में गणेशजी की प्रतिमा विराजित की गईं है और मंदिरों में भक्तो की भीड़ देखने को मिल रही है। वैसे तो भगवान गणेश के कई मंदिर हैं. कहीं इन्हें सिध्दी विनायक गणपति के रुप में पूजा जाता है तो कहीं इनकी राजा के रुप में अराधना की जाती है। आमतौर पर हम में से ज्यादातर लोगों ने अभी तक भगवान गणेश के गज रूप को ही देखा है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां भगवान गणेश की गजरूपी मूर्ति नहीं बल्कि उनके चेहरे की मूर्ति स्थापित है। जी हां यह गणेशजी का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां भगवान गणेश की मूर्ति गजमुखी न होकर इंसान स्वरूप में हैं। यह मंदिर तमिलनाडु में स्थित आदि विनायक मंदिर के नाम से जाना जाता है।

कराई जाती है पितृ पूजा

आदि विनायक मंदिर की खास बात यह है कि यहां लोग अपने पितरों की शांति के लिए पूजन करवाते हैं। मान्यता है कि भगवान राम ने भी अपने पूर्वजों की शांति के लिए इसी जगह पर पूजा की थी। जिसके चलते यहां आज भी कई भक्त अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूजा करने आते हैं।

कुटनूर के तिलतर्पण पुरी में स्थित है मंदिर

यह मंदिर तमिलनाडु के कुटनूर से 2 किमी. की दूरी पर तिलतर्पण पुरी के नाम से जाना जाता है। तिलतर्पण पुरी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है – पूर्वजों को समर्पित किया हुआ शहर।

भगवान गणेश के इस मंदिर में नरमुखी रूप के साथ-साथ भगवान शिव का भी मंदिर है। मंदिर के मध्य भाग में भगवान शिव का मंदिर है और उनके बाद भगवान गणेश के नरमुखी रूप के दर्शन कर सकते हैं।

मान्यता है कि एक बार भगवान भोलेशंकर ने क्रोध में आकर श्रीगणेश की गर्दन धड़ से अलग कर दी थी उसके बाद उन्हें गज का मुख लगाया गया तब से उनकी प्रतिमा इसी रूप में स्थापित होती है। लेकिन आदि विनायक मंदिर में नर रूप में इस प्रतिमा के स्थापित होने के पीछे की कहानी न मालूम होने के कारण यह प्रतिमा लोगों के आश्चर्य का विषय बनी है।

इस मंदिर की एक और मान्यता है कि भगवान गणेश के दर्शन के बाद वहां मौजूद देवी सरस्वती के भी दर्शन करना होता है नहीं तो आपकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।

Leave A Reply