अखिलेश ने खेला नया दांव, बोले सपा आई तो आंदोलन में शहीद परिवारों को 27 लाख

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लखनऊ। यूपी में अगले साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपने राजनीतिक दांव पेंच खेल कर एक दूसरे के वोट काटने में लगे हैं. तीनों कृषि कानूनों को जहां केंद्र की बीजेपी ने वापस लेकर अपनी राजनीतिक घुसपैठ जनता के बीच मजबूत करने का प्रयास किया तो वहीँ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज तीनों कृषि कानूनों की वापसी बिल पर कैबिनेट की मुहर लगते ही, कुछ देर बाद यह घोषणा कर दी है कि आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये की सहायता सपा कि सरकार बनने पर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि किसान का जीवन अनमोल होता है क्योंकि वो ‘अन्य’ के जीवन के लिए ‘अन्न’ उगाता है. हम वचन देते हैं कि 2022 में समाजवादी पार्टी की सरकार आते ही किसान आंदोलन के शहीदों को 25 लाख की ‘किसान शहादत सम्मान राशि’ दी जाएगी.

सपा के टारगेट पर BJP सरकार

अखिलेश यादव लगातार बीजेपी सरकार को घेरने में लगे हैं. 19 नवंबर को भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा था कि अमीरों की भाजपा ने भूमिअधिग्रहण व काले कानूनों से गरीबों-किसानों को ठगना चाहा. कील लगाई, बाल खींचते कार्टून बनाए, जीप चढ़ाई लेकिन सपा की पूर्वांचल की विजय यात्रा के जन समर्थन से डरकर काले-कानून वापस ले ही लिए. भाजपा बताए सैकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सजा कब मिलेगी.

आप नेता संजय सिंह से हुई अखिलेश की मुलाकात

आम आदमी पार्टी (आप) के यूपी प्रभारी व राज्य सभा सदस्य संजय सिंह ने बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। आप नेता संजय सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश को बीजेपी से मुक्त कराने के लिए एक सामान्य मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हुई है. गठबंधन को लेकर बातचीत तय होगी तो जानकारी दी जाएगी. सीटों को लेकर अभी कोई बात नहीं हुई है. उधर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस मुलाकात के बाद गठबंधन पर सहमति बनते ही बीजेपी सरकार को खास असर पड़ सकता है.

तीनों कानून रद्द होने के प्रस्ताव को कैबिनेट से मिली मंजूरी

बता दें, केंद्रीय कैबिनेट ने तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 दिन पहले यानी 19 नवंबर को कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था. कैबिनेट की मंजूरी के बाद कानून वापसी के प्रस्ताव को संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में पारित करवाया जाएगा. इसके बाद किसान आंदोलन की वजह बने तीनों कृषि कानून खत्म हो जाएंगे.