BJP और BSP के वोटबैंक में सेंध लगाने पहुंचे अखिलेश, बुंदेलखंड में जुटा रहे हैं समर्थन

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बांदा। यूपी के बुंदेलखंड में सूबे के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बांदा में एक जनसभा संबोधित कर रथ यात्रा की शुरुआत की. उनकी रथ यात्रा यहाँ के चारों जिलों में घुमाई जाएगी। इस दौरान अगले साल सूबे में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर काफी अहम मानी जा रही है। समझा जाता है कि पिछले दिनों पीएम मोदी की करोड़ों रुपये की जल परियोजना की सौगात देने के बाद पानी के संकट से जूझ रही यहाँ की जनता को काफी राहत देकर बीजेपी ने अपनी पकड़ जनता के बीच मजबूत कर ली है। ऐसे में सपा सुप्रीमो की यह रथ यात्रा साल 2022 के चुनाव को लेकर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसीलिए चुनाव से पहले सपा बुंदेलखंड में अपनी जेड कमीनी स्तर पर मजबूत करने में लगी है। इसी के चलते बांदा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने अपनी रथ यात्रा शुरु की। मालूम हो कि देश के 2022 के विधानसभा चुनाव के लिये राजनैतिक दलों में चुनावी घमासान शुरू हो चुका है। इसी के तहत समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने तीन दिवसीय दौरे पर बुंदेलखंड बुद्धवार को पहुंचे हैं। उनकी यह रथयात्रा तीन दिनों में बुंदेलखंड के चार ज़िलों से गुज़रेगी।

भाजपा के गढ़ बुंदेलखंड में उन्होंने कई मुद्दे उठाए हैं, जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, पानी की किल्ल्त, योगी राज में उत्तर प्रदेश पिछड़ गया है। सबका काम छिन गया है, किसान को धान की कीमत नहीं मिली, नौजवान के पास रोजगार नहीं है, बिजली कारखाने नहीं लगे, भाजपाई जीप चढ़ाते हैं और जीभ चलाते हैं, अंग्रेज ‘बांटो और राज करो की, ‘नीति’ पर चलते थे। भाजपाई समस्यायों को लेकर डरते हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि 2022 के चुनावों में जनता भाजपा का सफाया करेगी। उन्होंने उपस्थित जन समुदाय से अपील की। वह भाजपा के खिलाफ मतदान करें।

उन्होंने कहा कि भाजपा की इस बार ऐसी ऐतिहासिक हार होगी, जिसका उन्हें अंदाज भी नहीं होगा। रथयात्रा में अखिलेश के दौरान जनसभा में आयी भीड़ से उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर राज्य में मुफ्त सिंचाई और 1500 रुपये महीना की समाजवादी पेंशन देने का ऐलान किया। रैली में अखिलेश यादव ने कहा हमें सरकारी बजट से ज्यादा मदद करनी पड़े। चाहे हमें समाजवादी पेंशन से अच्छी कोई योजना चलानी पड़े। अपनी माताओं , बहनों और परिवार को सम्मान देने के लिए पहले 500 रुपये दिए थे और अब परिवार की मदद करने का काम समाजवादी सरकार का होगा।

समाजवादियों ने बहुजनों की राजनीति शुरु कर दी है। हालात तो इसी बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं पिछड़ों के साथ-साथ अब अखिलेश यादव ने दलित वोटबैंक पर भी डोरे डालने शुरु कर दिये हैं और वह भी बहुत आक्रामक तरीके से। पिछले कुछ महीने के घटनाक्रम तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं। अखिलेश यादव ये लक्ष्य दो तीरों से साध रहे हैं। पहला तो ये कि वे अपनी हर रैली में दलित समाज से जुड़े मुद्दे उठाकर अपने आप को इनका रहनूमा बता रहे हैं और दूसरा ये कि उन्होंने बसपा से ठुकराये गये नेताओं को तहे दिल से गले लगा लिया है।

सवाल जब 24 फीसदी वोट बैंक का हो तो शतरंज की चाल बदलनी जरुरी हो जाती है। फिलहाल अखिलेश यादव ने भी यही किया। दरअसल अखिलेश यादव यह बात जानते हैं कि पिछड़ों के साथ यदि दलितों के वोट जुड़ जायें तो विजयश्री मिलनी तय हो जायेगी। इसीलिए उन्होंने बहुजनों को साधना शुरु किया। बहरहाल बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने इस फंडे को छोड़ दिया है, जिसे अब अखिलेश ने अपनी जीत का फंडा चुना है।