एक अनकही कहानी———

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एक अनकही कहानी के तहत हमने अपने पिछले प्रोमो में आपको बताया था कि आजादी के आंदोलन से पहले आज पिछड़ी और निचली कही जाने वाली जातियां लोध, केवट, मल्लाह, पासी, गोंड, गूजर, राजभर और अहीर छिप-छिपकर अपने तीर-कमानों से अंग्रेज अफसरों के घोड़ों की गरदनें उड़ा दिया करते थे। उनके घोड़े घायलावस्था में बेजान होकर गिर पड़ते और तब ये लोग अंग्रेजों को उनके जुल्म की सजा देते। अंग्रेज अफसर समुदायों में चलने लगे। उस जमाने में जंगल बहुत हुआ करते थे।

इन जातियों के मुखिया यह करते कि अपने साथ जवान पट्ठों को लेकर जंगली रास्तों को घास-फूस और कांटों से रूंध देते। रूंधना एक गंवई शब्द है लेकिन इसका मतलब है बन्द कर देना। बहरहाल अंग्रेज जब समुदाय में गुजरते तो चारों तरफ रास्तों में आग लगा दी जाती जिससे अंग्रेजों के घोड़ों को भागने की जगह नहीं मिलती और उन सबके प्राण वहीं निकल जाते। ये ऐतिहासिक तथ्य 1857 के पहले के हैं।

आपको एक बात यह भी बता दें कि ये ऐतिहासिक तथ्य सामने आये हैं कि 1857 की क्रांति में तत्कालीन संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध, जिसे अब उत्तर प्रदेश कहा जाता है। यहां के साथ ही मध्य प्रांत, बराड़, बाम्बे प्रेसीडेंसी, बंगाल प्रेसीडेंसी, मद्रास प्रेसीडेंसी और दिल्ली-मेरठ क्षेत्र में लोध, केवट, खटिक, पासी और गूजर समुदायों ने ब्रिटिश सरकार से मोर्चा लिया था। आपको एक उदाहरण बताता हूं कि आज जिसे हम कंजड़ समुदाय कहते हैं, किसी जमाने में वही कबूतरा समाज था और इसी समाज को साथ लेकर रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से टक्कर लिया था। लोधी राजपूतों का नेतृत्व करने वाले गनेश महतो ने अंग्रेजों से मोर्चा लिया था। इसी प्रकार अहीरों का इतिहास भी शौर्य गाथाओं से भरा पड़ा है।

यह कहानी उन लोगों की है जो आजादी के बाद के सफर में गुमनाम रह गये। चलिये, कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाते हैं। आपको शायद ही याद हो कि आज जहां तीस हजारी कोर्ट है वहां तीस हजार लोगों को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था। और इन तीस हजार लोगों में 70 फीसदी उन जातियों के लोग थे जिन्हें आज हम पिछड़ा मानते हैं।

अब जो मैं आपको बताने जा रहा हूं, शायद आप भावुक हो उठें या फिर आपके रोंगटे खड़े हो जाएं। यह हजारों वर्षों से होता चला आया है कि बड़े-बड़े शूरवीर भी अपनी पत्नी और बच्चों पर जुल्म होते देख पिघल जाया करते हैं। तिलमिलाये अंग्रेजों ने साजिश रची और उनसे मोर्चा लेने वाले 190 जातीय समूहों को ही अपराधी घोषित कर दिया। उस समय के जमींदारों को यह अधिकार दिया गया कि वे इन जातियों को अपने क्षेत्राधिकार में आपराधिक सूची में डालें। अब आप सोचिये कि जो जातियां अंग्रेजों से मोर्चा ले रही थीं उन पर स्थानीय जमींदार भी तिरछी नजर रखने लगे। इतना ही नहीं राजभर, अहीर और कुछ अन्य जातियों पर और भी जुल्म ढाने शुरू हो गये।

ये जुल्म 1871 में उस समय से और बढ़ गया। जब अंग्रेज सांसद मिस्टर स्टीफन क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लेकर आ गये। इन्हीं जातियों पर जुल्म ढाने के लिए उनका एक अजीब तर्क था कि डॉक्टर के यहां डॉक्टर और वकील के यहां वकील पैदा होते हैं लेकिन चोर के यहां चोर, गुनहगार के यहां गुनहगार और डाकू के यहां डाकू पैदा होते हैं। सारी हदें पार करते हुए इन वर्गों में जन्म लेने वाले हर बच्चे को अपराधी बताया गया और भारत पर राज करने के लिए इस बिल को ब्रिटिश संसद में पास कर दिया गया। इसका आलम यह हुआ कि तमाम जातियों की जरूरी सेनाओं में भर्ती पर रोक लगा दी गयी और पुलिसवालों को ट्रेनिंग के दौरान ही बता दिया जाता कि किन जातियों को अपराधी घोषित किया गया है और उनसे किस तरह से पेश आना है।

कुछ जातियों पर तो नजर रखने के लिए चारों ओर ऊंची-ऊंची दीवारें बनाकर बीच में बस्तियां बसायी गयीं। ऐसी बस्तियों को सीटीएस नाम दिया गया। सीटीएस यानी क्रिमिनल ट्राइब्स सेटलमेंट। इनकी दीवारों में 14 फुट ऊंची वायर फेंसिंग यानी कंटीले तार हुआ करते थे। जिससे यहां रहने वाले भाग न पायें। जरा सोचिये, रोजगार और पढ़ाई-दवाई तो दूर अपने ही देश में ये जातियां किस तरह का जीवन बिता रही थीं और तो और इन बस्तियों के द्वार पर पुलिस का पहरा होता था। अगर बस्ती के किसी बच्चे को भी द्वार से बाहर निकलना है तो पुलिसवालों से इजाजत लेनी होती थी और पुरुषों को कहीं जाना है तो आते और जाते समय सम्बन्धित पुलिस चौकी पर नाम लिखाना होता था।

अब आप जरा कल्पना कीजिए कि जिन्हें हम आज पिछड़ी और निचली जातियां कहते हैं, इनमें से जिन्होंने अंग्रेजों से मोर्चा लिया। पैदा होते ही उनके बच्चों को अपराधी घोषित करने के बाद अंग्रेजी हुकूमत ही नहीं भारत के तत्कालीन जमींदार और अंग्रेजों के चापलूस अपने ही देश की इन जातियों की महिलाओं और बच्चों के साथ किस तरह पेश आते होंगे? यह सवाल मैं आप पर छोड़ता हूं। जल्दी ही एक और अनकही कहानी के साथ मैं आपके समक्ष फिर हाजिर होता हूं। बस एक ही गुजारिश है, चैनल को लाइक और सब्सक्राइब करना न भूलियेगा।

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