बिहार कांग्रेस नेताओं का फूटा प्रदेश प्रभारी पर गुस्सा, जानें क्यों ?

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पटना। बिहार कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट साफ सुनाई दे रही है। इस बीच राज्य कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने बिहार कांग्रेस में पदाधिकारियों की जो सूची तैयार की है, उसमें वरिष्ठता को भी नजरंदाज कर दिया गया है। साथ ही उम्र और अनुभव का भी ध्यान नहीं रखा गया है। जिसके चलते पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि इसमें बहुत अधिक पदाधिकारी हैं। यही नहीं इसे बनाते समय उम्र, अनुभव और वरिष्ठता को ताक पर रखकर बनाया गया है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित सूची में नेताओं की उम्र और अनुभव को गंभीरता से नहीं लिया गया है। इसके अलावा सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान नहीं रखा गया है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जगह देने और अनुभव और वरिष्ठता की अनदेखी करने पर पार्टी में नाराजगी है।

बिहार कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, संगठन में और लोगों को जगह देने का प्रस्ताव भी अनुचित है। उन्होंने कहा कि कई कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव कांग्रेस की संस्कृति के खिलाफ है। सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित सूची में अध्यक्ष के अलावा आधा दर्जन से अधिक कार्यकारी अध्यक्ष, एक दर्जन उपाध्यक्ष और बड़ी संख्या में महासचिव हैं, जो आवश्यकता से अधिक हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि संगठन में बदलाव के प्रस्ताव पर नाराजगी से पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी नेता राहुल गांधी को अवगत करा दिया गया है।

उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “प्रस्तावित सूची जारी नहीं की जाएगी और इसमें बदलाव होगा और पार्टी इस पर मंथन कर रही है। संगठन में बदलाव क्षेत्रीय संतुलन, जाति, अनुभव, उम्र, कार्यक्षमता जैसी चीजों को ध्यान में रखकर ही होगा।” कांग्रेस सूत्र ने बताया कि बिहार में राज्य में अधिक लोकसभा और विधानसभा सीटें जीतने के लिए पार्टी को मजबूत करना होगा। अतः प्रस्तावित सूची त्रुटिपूर्ण है।

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