छत्तीसगढ़ के CM भूपेश बघेल की फिर होगी दिल्ली दौड़, जानें क्या है पूरा मामला ?

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जारी आंतरिक कलह के बीच राहुल गांधी के बस्तर दौरे को अंतिम रूप देने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिल्ली आ सकते हैं। इस बात की जानकारी सीनियर मंत्री और सरकार के प्रवक्ता रविंद्र चौबे ने बुधवार को दी। चौबे ने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा की तैयारी पूरी है और बस्तर के कोंटा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कुछ दिन पहले इसकी समीक्षा की और कार्यक्रम के संभावित स्थान का सुझाव दिया।

प्रेस मीट में चौबे ने कहा, ‘पिछली बार जब बघेल जी ने (भूपेश बघेल) दिल्ली का दौरा किया था तो उन्होंने राहुल जी (राहुल गांधी) को राज्य में आमंत्रित किया था। राहुल जी ने यात्रा के लिए अपनी स्वीकृति दे दी.. हम सभी तैयार हैं और अब मुख्यमंत्री के अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिल्ली जाने की संभावना है और फिर वह डेट फाइनल करने को लेकर राहुल जी के साथ चर्चा करेंगे।’

मंत्री ने आगे कहा कि राहुल गांधी राज्य के सरगुजा संभाग और छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में यात्रा कर सकते हैं। बता दें कि दो दिन पहले ही टीएस सिंह देव भी दिल्ली दौरे पर आए थे। दरअसल, जब पिछले महीने छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मुख्यमंत्री कुर्सी को लेकर झगड़ा सामने आ गया था तो 28 अगस्त को कांग्रेस आलाकमान के साथ लंबी बैठक के बाद यह सुझाव सामने आया कि राहुल गांधी खुद राज्य का दौरा करेंगे और उसके बाद ही विवाद पर कोई फैसला होगा।

दिल्ली दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने दावा किया था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अगले सप्ताह राज्य का दौरा करेंगे, खासकर उसे देखने के लिए जो बस्तर में जो काम हो रहा है। हालांकि, अगले ही दिन जब सिंहदेव लौटे तो उन्होंने कहा कि उन्होंने नेतृत्व से भी बात की थी और लीडरशिप ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है। तुलसीदेव सिंह की मांग है कि उन्हें अब राज्य की कमान सौंप दी जाए। टीएस सिंह देव के समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का समझौता हुआ था। हालांकि, बघेल खेमा इससे इनकार करता रहा है।

सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल को बदलना है या नहीं, इस पर राहुल गांधी को ही आखिरी फैसला लेना है और वह जल्द ही ऐसा करेंगे। माना जा रहा है कि बस्तर यात्रा के बाद ही वह आखिरी फैसला लेंगे। हालांकि पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि राहुल गांधी ने अभी तक इस मसले पर ज्यादा सोच-विचार नहीं किया है। इधर, भूपेश बघेल अपने पद पर बने रहने को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।

टीएस सिंह देव ने शीर्ष पद के लिए दावा पेश किया है और यह तर्क दिया है कि दिसंबर 2018 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद उन्हें बघेल के साथ एक अलग कार्यकाल का वादा किया गया था। दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी। उस दौरान कांग्रेस की लीडरशिप राजस्थान और मध्य प्रदेश में अंतर्कलह को लेकर भी परेशान थी। तब भूपेश बघेल के अलावा ताम्रध्वज साहू, चंद्रदास महंत और टीएस सिंह देव ने सीएम पद के लिए दावा किया था।

 

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