Ganesh Chaturthi : पूजा करते समय रखें इन बातों का खास ध्यान

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धर्म / आध्यात्म। गणेश चतुर्थी का हिन्दू धर्मं में बहुत खास महत्व है। ये त्योहार भारत के अलग अलग कोनो में बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है। मगर महाराष्ट्र में इसकी धूम देखने लायक होती है। पुराणों की माने तो इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाको में गणेश जी की बड़ी मूर्तियों की स्थापना भी की जाती है। बड़ी संख्या में आस पास के लोग इनका दर्शन करने पहुँचते है। सभी देवों में प्रथम आराध्य देव श्रीगणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का त्योहार इस साल 10 सितंबर यानी आज से शुरू हो रहा है। आज भगवान गणेश विराजेंगे और 19 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी के दिन उन्हें विदा किया जाएगा। इन मूर्तियों की नौ दिनों तक विधि विधान से पूजा की जाती है।

शिवपुराण में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है। इसके अलावा कई अलग अलग कहानियां जिनसे चतुर्थी तिथि जुडी हुई है। भगवान गणेश के कई नाम है,गजानन लम्बोदर, गणपति इन सभी नामो का अलग अर्थ है। गजानन यानि गज जैसे मुख वाले। मतलब जिसका मुहं हाथी जैसा है। लम्बोदर यानि बड़े पेट वाले गणपति यानि पवित्रकों के स्वामी और उनके सबसे लोकप्रिय नाम गणेश का अर्थ होता है गणों का ईश।

हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य हैं गणेश

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। किसी भी शुभ काम या पूजा की शुरुआत इनकी अराधना से की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से शुरू किया गया काम बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाता है। भगवान गणेश को सुख, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है जो व्यक्ति इनकी सच्चे मन से पूजा करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं क्योंकि ये विघ्नहर्ता भी हैं।

मूर्ति रखने की दिशा की रखे जानकारी

कई लोग घरों में श्री गणेश कि मूर्ति लाते है इसके लिए आपको ये जानकारी होनी चाहिये कि गणेश जी की मूर्ति घर के उत्तरी पूर्वी कोने में रखना सबसे शुभ माना जाता है। ये दिशा पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम होती है। इसके अलावा गणेश जी की प्रतिमा घर के पूरब या फिर पश्चिम दिशा में भी रखी जा सकती हैं।

घर में गणेश जी की प्रतिमा रखने से आती है समृधि

गणेश जी की प्रतिमा रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि भगवान के दोनों पैर जमीन को स्पर्श कर रहे हों। मान्यता है कि इससे सफलता मिलती हैं। गणेश जी की प्रतिमा को दक्षिण दिशा में कभी न रखें। साथ ही घर में बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है। मान्यता है इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। घर में गणेश जी की ऐसी ही प्रतिमा लगाएं जिसमें उनकी सूंड बायीं तरफ झुकी हुई हो और पूजा घर में सिर्फ एक ही गणेश जी की प्रतिमा हो। गणेश चतुर्थी पूजन का शुभ मुहर्त इस बार दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर शुरू होकर रात 10 बजे तक रहेगा।

भगवान गणेश को प्रिय हैं मोदक

अगर आप भी भगवान गणेश को खुश करके उनसे मनचाहा आशीर्वाद पाना चाहते है तो पूजा करते समय उन्हें दूभघास, गन्ना और बूंदी के लड्डू चढ़ाए मान्यता है कि भगवान गणेश को ये बहुत पसंद हैं। एक और ख़ास बात यह है कि अधिकतर पूजा पाठ करते वक्त तुलसी दल का प्रयोग किया जाता हैं, शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल पूरी तरह से वर्जित है। गणपति जी को तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाने चाहिए। मान्यता है कि तुलसी ने भगवान गणेश को लम्बोदर और गजमुख कहकर उनका मजाक उड़ाया था, इससे नाराज होकर गणपति ने उन्हें श्राप दे दिया था।

गणेश चतुर्थी कि एक ख़ास बात ये भी है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात में चन्द्रमा देखने को निषिद्ध है। जो इस रात को चन्द्रमा देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक मिलता है । लेकिन अगर जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्यामंतक मणि की कथा ज़रूर सुन लेनी चाहिए । कहा जाता है कि भगवन कृष्णा पर भी ये चाँद देखने से मणि चुराने का कलंक लगा था । 

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