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किसान आंदोलन: क्या किसानों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है? राकेश टिकैत बन रहे मनमुटाव की वजह

28-03-2021 13:13:23 8 Total visiter


नई दिल्ली। किसान आंदोलन को शुरू हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार और किसानों के बीच बात बनती नहीं दिख रही। उधर, देश के तकरीबन 40 किसान संगठनों को एक छतरी के नीचे लाने के लिए बने संयुक्त किसान मोर्चे के बीच रह-रहकर दरारें दिखने लगी हैं।

26 जनवरी को लाल किले पर हुई ट्रैक्टर परेड और हिंसा के बाद आंदोलन लगभग खत्म होने की कगार पर था, लेकिन 29 जनवरी को 'राकेश टिकैत' के आंसू रंग लाए और आंदोलन फिर खड़ा हो गया। टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन को खत्म होने से तो बचाया साथ ही उन्हें किसान आंदोलन का चेहरा भी बना दिया।

टिकैत के आंदोलन का चेहरा बनने से संयुक्त मोर्चे में शामिल किसान संगठन बिदकने लगे हैं। राकेश टिकैत के 26 मार्च को आए एक बयान से यह दरारें फिर साफ दिखने लगी हैं। टिकैत ने कहा कि 'वह दिल्ली-यूपी के गाजीपुर बॉर्डर पर पक्के निर्माण करेंगे।' संयुक्त मोर्चा पहले भी यह साफ कर चुका है कि धरना स्थल पर पक्के घर बनाने का फैसला उनका नहीं है।

राकेश टिकैत ने धरनास्थल पर किसानों को पक्का घर बनाकर रहने की सलाह एक बार फिर दे दी है। वे कहते हैं कि 'आंधी, पानी, गर्मी से बचने के लिए किसानों को पक्का घर बनाना पड़ेगा। सरकार अगर हमारी बात नहीं सुनती तो हमें ऐसा करना पड़ेगा। सिंघु बार्डर, टीकरी बार्डर और गाजीपुर में भी पक्के मकान बनने शुरू भी हुए। उधर संयुक्त मोर्चे ने यह तय किया था कि इस तरह का कोई कदम किसान नहीं उठाएंगे।'

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