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शब-ए-बारात के दिन मरकज का दरवाजा गया खोला, 50 लोगों ने अदा की नमाज

Shikha Awasthi 30-03-2021 12:08:57 43 Total visiter


नई दिल्ली। पिछले साल कोरोना महामारी में मार्च में निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज में बिना अनुमति सैकड़ों लोग जमा हुए थे। वहीं जब पुलिस को इस बारे सूचना मिली थी तो पूरे देश में हंगामा मच गया था। तब पुलिस ने इसे खाली कराना शुरू किया जिससे जमात के लोग जहां-जहां गए वहां कोरोना के मामले में तेजी से बढ़ने लगे। कई दिनों तक यह मामला गरमाता रहा। अब एक साल बाद रविवार को शब-ए-बारात के दिन मरकज का दरवाजा खोल दिया गया। हालांकि चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती थी और पहले से अनुमति लिए हुए सिर्फ 50 लोगों को अंदर जाने दिया गया।

छह मंजिला इमारत के इस मरकज में पुलिस ने सभी का आइडेंटी कार्ड चेक किया और जिसे पहले से थाने में अनुमति मिली थी, सिर्फ उसे ही जाने दिया गया। बता दें कि पिछले साल मार्च में कोविड-19 गाइडलाइन का उल्लंघन कर मरकज में सैंकड़ों लोग कई दिनों से जमा थे। इसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इसके बाद मरकज को सील कर दिया गया था। यह इलाका कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया था।

वहीं पिछले सप्ताह केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा था कि वक्फ बोर्ड द्वारा चुने गए 50 लोगों को मरकज के अंदर जाने की अनुमति होगी। मरकज के अंदर मस्जिद में ये लोग नमाज पढ़ सकते हैं। त्योहार के दिन ये लोग स्थानीय थाने से अनुमति लेकर अंदर जा सकते हैं। रविवार को तब्लीगी जमात के एक सदस्य ने बताया कि मरकज को खोलना अच्छा कदम है लेकिन इसमें जाने की अनुमति और लोगों को देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें कोविड गाइडलाइन का पालन करने में खुशी है लेकिन अन्य जगहों पर कोविड गाइडलाइन का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज जहां चुनाव हो रहे हैं, वहां कोविड गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। वहां भी नियम को सख्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले साल सरकार और मीडिया ने हमें मानव बम दिया था। जबकि सच्चाई यह थी कि जिस तरह अन्य जगहों पर लॉकडाउन में लोग फंस गए थे, उसी तरह हम लोग भी यहां फंसे हुए थे।

 

 

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