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2011 वर्ल्ड कप जीत पर गंभीर बोले-सिर्फ एक छक्के से नहीं, बल्कि हर खिलाड़ी के योगदान से बने चैंपियन

02-04-2021 17:58:38 30 Total visiter


नई दिल्ली।  दस साल पहले आज ही के दिन भारत वर्ल्ड कप जीतकर वनडे क्रिकेट का नया बादशाह बना था। हालांकि, 1983 के बाद इस सपने को सच करने में 28 साल लग गए। लेकिन जब ये पूरा हुआ तो सारा देश खुशी से झूम उठा था। आज फिर से लाखों क्रिकेट फैंस उस लम्हे को याद कर रहे हैं। 2011 वर्ल्ड कप में हर खिलाड़ी ने अपने-अपने तरीके से टीम की जीत में योगदान दिया। लेकिन एक खिलाड़ी खास रहा। क्योंकि उसने श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में सचिन तेंदुलकर  और वीरेंद्र सहवाग के जल्दी आउट होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और 97 रन की पारी खेलते हुए टीम की जीत की नींव रखी। इस खिलाड़ी का नाम गौतम गंभीर है। गंभीर भी आज तक वर्ल्ड कप जीत को नहीं भूले हैं।

इस जीत के 10 साल पूरे होने पर गंभीर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में भारतीय टीम की सफलता, कप्तान और कोच के योगदान और भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि भारत को 28 साल बाद वर्ल्ड चैम्पियन बनाने में हर खिलाड़ी का योगदान रहा। ये किसी एक की जीत नहीं थी। 

पिछले साल एक क्रिकेट वेबसाइट ने वर्ल्ड कप जीत के 9 साल पूरे होने पर महेंद्र सिंह धोनी  की छक्का मारकर फाइनल जिताने की तस्वीर पोस्ट की थी. इस तस्वीर के साथ ये कैप्शन भी दिया था कि वो शॉट जिसने करोड़ों फैंस को खुशी में झूमने पर मजबूर कर दिया. गंभीर को ये बात हजम नहीं हुई थी और तब उन्होंने कहा था कि सिर्फ एक छक्के की बदौलत नहीं, बल्कि पूरी टीम और सपोर्ट स्टाफ की मेहनत के दम पर भारत चैम्पियन बना था. गंभीर ने यही बात वर्ल्ड कप जीत के 10 साल पूरे होने पर टीओआई को दिए इंटरव्य़ू में भी दोहराई।

ये दुर्भाग्यपूर्ण कि हम देश में व्यक्तियों की पूजा करने लगते हैं: गंभीर

उन्होंने कहा कि आपको लगता है क्या किसी एक खिलाड़ी ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के दम पर हमें वर्ल़्ड कप जिताया ?. अगर ऐसा होता है तो टीम इंडिया अब तक हुए सभी वर्ल्ड कप जीत गई होती। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में हम कुछ व्यक्तियों की पूजा करने लगते हैं। मैं इस पर कभी विश्वास नहीं करता।

किसी भी टीम गेम में, व्यक्तियों की कोई जगह नहीं है। ये सिर्फ योगदान की बात है। क्या आप फाइनल में जहीर खान के योगदान को भूल सकते हैं?. जब उन्होंने अपने पहले स्पैल में लगातार तीन मेडन ओवर फेंके थे. क्या आप ये भूल सकते हैं कि युवराज ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्या किया था?. इतना ही नहीं, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के शतक को कोई कैसे भूल सकता है?.

हम एक छक्के को बार-बार क्यों याद करते हैं?. अगर एक छक्का हमें वर्ल्ड कप जिता सकता है, तो फिर मेरा मानना है कि कि युवराज सिंह को कम से कम भारत को 6 वर्ल्ड कप जिताने थे, क्योंकि उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 2007 के टी20 वर्ल्ड कप में लगातार 6 गेंद पर 6 छक्के मारे थे। कोई युवराज के बारे में बात नहीं करता है। वो 2011 के वर्ल्ड कप में मैन ऑफ दे टूर्नामेंट थे। लेकिन हम सिर्फ एक छक्के के बारे में बात करते रहते हैं।

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