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थाईलैंड युवती प्रकरण: सवाल लखनऊ पुलिस के इकबाल का है

Shikha Awasthi 10-05-2021 19:10:05 21 Total visiter


लखनऊ। थाईलैंड की युवती प्रकरण में लखनऊ पुलिस कितना सच सार्वजनिक कर पायेगी, इस बड़े सवाल के साथ ही यह भी सवाल उठता है कि पुलिस का इकबाल बुलन्द हो और उस पर अविश्वास का कोई धब्बा न लगने पाये। इसको देखते हुए पुलिस के सामने अब चुनौती बड़ी हो गयी है। मामले में जो पेंच हैं उन्हें सुलझाना उतना कठिन नहीं है जितना कठिन यह है कि बड़े नेता या कारोबारी के किसी बेटे के शामिल होने के बावजूद पुलिस किसी दबाव या लालच में न आये और पूरी स्टोरी में तथ्यों को बिना छुपाये ही जस का तस लोगों के सामने बड़ी साफगोई से रख दे क्योंकि सवाल लखनऊ पुलिस के इकबाल का है और यह चुनौती भी किसी बड़ी लूट की घटना खोलने या हत्याकाण्ड का खुलासा करने से कम नहीं है। यह वक्त पुलिस के इकबाल बुलन्दी का है।

लखनऊ पुलिस के सामने यह भी एक सामान्य मौत की घटना होती, अगर मामले में राज्यसभा सदस्य और बड़े कारोबारी संजय सेठ के बेटे का नाम न आया होता। यह नाम कैसे अखबारों में सुर्खियां बना, यह अलग जांच का विषय है। बहरहाल अभी तो पूरा मामला युवती से जुड़ा है। चुनौती इसीलिए बड़ी है क्योंकि अगर बड़े सफेदपोश या कारोबारी इसमें इन्वाल्व हैं तो पूरी सच्चाई सार्वजनिक न होने पाये, इसके लिए वे न केवल अपनी सारी ताकत और सिफारिशें लगा देंगे बल्कि दौलत की गड्डियां भी झोंक दी जाएंगी। इसलिए मामले को अन्दरूनी तौर पर सुलझाना उतना कठिन नहीं है जितना कठिन उसका सार्वजनिकीकरण है।

हालांकि लखनऊ पुलिस पर तमाम सवाल अभी से उठने लगे हैं मसलन यह कि एक विदेशी युवती की लखनऊ में मौत हो जाती है और मामला विदेश से जुड़ा होने के बावजूद लखनऊ की पुलिस क्या इतनी भोली है कि तब गाइड से सारे पहलुओं पर कड़ाई से पूछताछ नहीं की जाती है जो अब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत पड़ी? अगर इस मामले में कोई बड़ा इन्वाल्व रहा है तो क्या अब तक पुलिस को जानकारी नहीं है? क्या पुलिस ने अब तक यह जानने की कोशिश नहीं की कि युवती की रातें एक ही होटल में बीतीं या वह कुछ अन्य स्थानों पर गयी? वे स्थान कौन से हैं? इतने दिनों के बीच युवती किन-किन के सम्पर्क में आयी? क्या रिसेप्शन पर रोजाना उसके आने-जाने का समय दर्ज है? होटल के विजिटर रजिस्टर पर क्या उससे मिलने आने वाले आगन्तुकों के नाम दर्ज हैं?

जांच का सबसे बड़ा बिन्दु तो यह है कि जब एक-एक कोविड पेशेंट को भर्ती कराने के लिए अस्पतालों में इतनी मारामारी चल रही है तो क्या महज एक गाइड के कह देने भर से लोहिया संस्थान में बड़ी आसानी से युवती को बेड उपलब्ध हो जाता है? क्या इसके लिए अस्पताल के किसी कर्मचारी की मदद ली गयी, उसे पैसे दिये गये? और क्या उसे लोहिया संस्थान में भर्ती कराने से पहले किसी प्राइवेट अस्पताल में भी दिखाया गया? प्राइवेट अस्पताल में कौन उसे दिखाने ले गया और किसने फीस भरी? और सबसे बड़ी जांच तो उसके काल्स डिटेल्स की है जिसमें कई तथ्य प्रमाणिक तौर पर सामने आ जायेंगे। और अगर यह एक सामान्य सी घटना है तो मुकदमा उन पर भी चलना चाहिए जिन्होंने पूरे मामले में लोगों को भ्रमित किया?

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