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क्या अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारी साख गिर रही है?

Shikha Awasthi 15-05-2021 16:22:28 22 Total visiter


एक ताजा घटनाक्रम के साथ अगर पुराने कई बिंदुओं को जोडक़र देखा जाए तो सवाल उठने लगा है कि क्या अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख गिर रही है? और यह सवाल शायद पूरे राष्ट्र के लिए बेहद अहम हो जाता है।

आपको बता दें कि अगले महीने 11 से 13 जून के मध्य जी-7 की बैठक होनी है। इसे ग्रुप-7 नाम इसलिए दिया गया है कि विश्व के सात समृद्ध देश कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन इसमें शामिल हैं। यह इसलिए और भी महत्वपूर्ण है कि विश्व की कुल सम्पत्ति की 62 फीसदी के लगभग इन राष्ट्रों के पास ही सम्पत्ति है। ये राष्ट्र वैश्विक स्तर पर योजना बनाते हैं कि आर्थिक मुद्दों, सुरक्षा और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा को कैसे हैंडिल किया जाएगा। यह काम बेहतर भविष्य की परिकल्पनाओं को सोचकर किया जाता है।

ग्रुप-7 की इस बैठक में हालांकि भारत स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन उसको बैठक में आमंत्रित किया जाना भारत के लिए एक सम्मानजनक बात है। इसलिए भारत के लिहाज से अगर देखें तो यह बैठक उसके लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब बात को थोड़ा आगे बढ़ाते हैं। जी-7 के राष्ट्रों की बैठक से पहले पिछले दिनों भारत के विदेशमंत्री एस जयशंकर लन्दन गये। एक प्राथमिक स्तर की बैठक के लिए। इसमें उन्होंने लन्दन में भारत के हाई कमिश्नर के साथ बैठक की। इस बैठक में कई और अधिकारी भी शामिल थे। बैठक सम्पन्न हो गयी। बाद में विदेश मंत्री ने जो ट्वीट किया उसमें देखा गया कि वह बैठक में मास्क नहीं लगाये हैं।

यह बात अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अखरी और कहा गया कि भारत में जब कोरोना संक्रमण की यह विकराल स्थिति है। ऐसी स्थिति में भी बैठक में मास्क न लगाया जाना अफसोसजनक है। इसका मतलब यह है कि लोग नियमों के पालन के आदी नहीं हैं। आपको बता दें कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस टिप्पणी के बड़े मायने होते हैं। अब अगर हम थोड़ा और पीछे जाएं तो देखते हैं कि वर्ष 2014 में डेमोक्रेसी इन्डेक्स में 167 देशों की सूची में भारत 27वें नम्बर पर था जो वर्ष 2020 में 53वें नम्बर पर पहुंच गया है। इसी प्रकार ह्यूमन डेवलपमेंट इन्डेक्स में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2014 में भारत 189 देशों में से 130वें स्थान पर था जो वर्ष 2020 में 131वें नम्बर पर पहुंच गया।

इसी प्रकार भ्रष्टाचार के मामले में 180 देशों में भारत 85वें स्थान पर था जो बढक़र 86वें स्थान पर पहुंच गया है तो हम किस आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी के समक्ष कह सकते हैं कि भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ है? और क्या इससे यह साबित नहीं होता है कि हमारी साख में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बट्टा लगा है।
 

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