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धार्मिक आजादी पर चीन का फिर कुठाराघात, तिब्बतियों की प्रथाओं पर लगाई रोक

Shikha Awasthi 15-05-2021 19:38:01 30 Total visiter


ल्हासा।हालही में अमेरिका की पर से चीन पर आरोप लगाया गया था कि चीन अपने यहां रहने वाले उइगर मुसलमानों की धर्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाता है और चीन में रहने वाले मुसलमानों को यातना शिविर ने रखता है। जिसका चीन और वहां की सरकारी मीडिया ने खूब विरोध किया था और अमेरिका के आरोपों को गलत बताया था। अभी यह मामला शांत नही हुआ था कि चीन ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा में रहने वाले लोगों से कहा है कि वे अपने पवित्र महीने ‘सागा दावा’ के दौरान कुछ धार्मिक प्रथाओं को प्रतिबंधित करें। चीन के इस कदम से एक बार फिर साबित हो गया है कि वह एक बार फिर बौद्ध आबादी वाले इस इलाके में धार्मिक स्वतंत्रता को कुचलने का काम कर रहा है।

मिली जानकरी के अनुसार, इस सर्कुलर को ल्हासा शहर के बौद्ध संघ को 9 मई को भेजा गया, जिसने लोगों को इसकी जानकारी दी। इसे ऐसे वक्त में भेजा गया, जब तिब्बती कैलेंडर का चौथा महीना बुधवार से शुरू हुआ। इस महीने को बौद्ध लोग बहुत पवित्र मानते हैं। चीन ने इस आदेश को लेकर कहा कि ऐसा कोरोना को फैलने से रोकने के लिए किया गया है। लेकिन मानवाधिकार समूहों ‘इंटरनेशनल कैंपेन ऑफ तिब्बत’ (ICT) का कहना है कि इसका वास्तविक उद्देश्य तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता को और प्रतिबंधित करना है।

कोरोना को हथियार बना रहा है चीन

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन तिब्बत में अपनी मनमानी कर रहा है और उसके लिए वह कोरोना को हथियार की तरह उपयोग कर रहा है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का संविधान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नेतृत्व का हवाला देता है। इस संविधान में कहा गया है कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता है। लेकिन इसमें ये भी लिखा है कि ये सामान्य धार्मिक गतिविधियों को सुरक्षा को लेकर सीमित कर देता है।

बता दें कि चीन की इन्ही गतिविधियों की वजह से उसकी दुनिया के कई देशों में आलोचना होती है। कनाडा, न्यूज़ीलैंड ने तो अपनी संसद में चीन के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित कर चूका है। अमेरिका भी समय-समय पर चीन की आलोचना करता रहता है। 

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