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जापान में ओलंपिक को लेकर सरकार और जनता हुई आमने-सामने, नही निकला कोई हल 

Shikha Awasthi 17-05-2021 17:13:07 19 Total visiter


टोक्यो। जापान में होने वाले टोक्यो ओलंपिक को लेकर सरकार के सामने एक और संकट आ खड़ा हुआ। एक ताजा सर्वे के अनुसार जापान की 70 प्रतिशत जनता ये नही चाहती की अभी जापान में ओलंपिक खेलो का आयोजन किया जाए। जापान में लगातार महामारी की वजह से खेलों को रद्द करने की मांग तेज होती जा रही है। लेकिन इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ओलंपिक का आयोजन कराने पर अड़ी हुई है। इस मामले में जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि ओलंपिक का आयोजन सरकार की प्राथमिकता नहीं है, लेकिन अंत में फैसला आईओसी का होगा। दरअसल, जापान एक अनुबंध के तहत बंधा हुआ है, जिसके अनुसार वह ओलंपिक के आयोजन को रोक नहीं सकता।

आईओसी ही कर सकता है ओलंपिक आयोजन को रद्द

अंतरराष्ट्रीय खेलों के वरिष्ठ वकील एलेक्जेंड्रे मिगुएल मेस्त्रे ने कहा कि ओलंपिक आईओसी की एक्सक्लूसिव प्रॉपर्टी है। आईओसी और मेजबान टोक्यो शहर के बीच हुए अनुबंध के तहत यहां सिर्फ आईओसी ही ओलंपिक के आयोजन को रद्द कर सकता है। टोक्यो प्रशासन के पास यह अधिकार नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यदि आईओसी को ऐसा लगे कि मेजबान शहर में युद्ध है या लॉ एंड ऑर्डर विफल है, जिससे खिलाड़ियों को खतरा है, तब वह आयोजन को रद्द कर सकता है। वैसे कोरोना महामारी को भी ऐसे खतरे के रूप में देखा जा सकता है। 

अनुबंध टूटने पर जापान को होगा नुकसान

सर्वे के बाद ऐसी अफवाहें सामने आ रही थी कि हो सकता है जापान आईओसी से अपना अनुबंध तोड़ दे। लेकिन ऐसा करने पर जापान को भारी नुकसान उठाना पद सकता है। क्योंकि जापान और आईओसी की ब्रॉडकास्टिंग स्पॉन्सरशिप में अरबों रुपये की हिस्सेदारी है। अनुबंध टूटने से इंश्योरेंस कंपनियां आयोजकों के प्रमुख खर्चों को कवर तो करेंगी, लेकिन वे अप्रत्यक्ष खर्चों को कवर नहीं करेंगी जिससे जापान के स्वास्थ्य और पर्यटन सेक्टर को भारी नुकसान होगा।

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