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कोविड के इलाज से हटाई गई प्लाज्मा थैरेपी, जानिए कितना पड़ेगा फर्क 

Shikha Awasthi 18-05-2021 11:19:10 16 Total visiter


नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने कोरोना मरीजों को दी जा रही प्लाज्मा थैरेपी को क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया है। AIIMS और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नेशनल टास्क फोर्स और हेल्थ मिनिस्ट्री की जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप ने शनिवार को इसका ऐलान करते हुए रिवाइज्ड क्लिनिकल गाइडेंस जारी की है।

ICMR ने गाइडेंस जारी करते हुए माना कि नियाभर में मरीजों के इलाज के आंकड़े प्लाज्मा थैरेपी के कारगर होने को साबित नहीं करते। बता दें कि सितंबर 2020 में ही ICMR ने अपनी स्टडी में कहा था कि प्लाज्मा थैरेपी कोरोना के इलाज में मददगार नहीं है। इसके बावजूद, उन्हें इसे भारत के क्लिनिकल प्रोटोकॉल से हटाने का फैसला लेने में 8 महीने लग गए है। 

क्या होती है प्लाज्मा थैरेपी?

कॉन्वल्सेंट प्लाज्मा थैरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इन्फेक्शन से रिकवर हुए व्यक्ति के शरीर से खून लिया जाता है। खून का पीला तरल हिस्सा निकाला जाता है। इसे इन्फेक्टेड मरीज के शरीर में चढ़ाया जाता है। थ्योरी कहती है कि जिस व्यक्ति ने इन्फेक्शन से मुकाबला किया है उसके शरीर में एंटीबॉडी बने होंगे। यह एंटीबॉडी खून के साथ जाकर इन्फेक्टेड व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को मजबूती देंगे। इससे इन्फेक्टेड व्यक्ति के गंभीर लक्षण कमजोर होते हैं और मरीज की जान बच जाती है। 

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