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अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, हो सकती है बड़ी कार्रवाई 

pooja 21-05-2021 15:59:55 17 Total visiter


नई दिल्ली। देश की सर्वोच्य अदालत ने कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों को झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को सही ठहराया है, जिसने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को डिफॉल्ट करने वाले कॉर्पोरेट देनदार के प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान करता है। कोर्ट के इस फैसले से अनिल अंबानी, विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे डिफॉल्टरों 

की मुश्किलें बढ़ सकतीं हैं। कोर्ट के इस फैसले ने कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के समापन के बाद ऋणदाताओं के लिए व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं से शेष ऋण की वसूली के लिए रास्ता साफ हो गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचना को ठहराया सही

आपकी जानकरी के लिए बता दें कि अनिल अंबानी, कपिल वधावन, संजय सिंघल और वेणुगोपाल धूत आदि उद्योगपतियों ने 15 नवंबर, 2019 की अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसमें इंसोल्वेंयी एंड बैंकरप्सी कोड आईबीसी के प्रावधानों का दायरा प्रोमोटो तक के लिए बढ़ा दिया गया था। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ की ओर से दिए गए इस फैसले में वर्ष 2019 की। इस अधिसूचना को कानूनी और वैध करार दिया गया है।

इस फैसले के बाद  एसबीआई  अनिल अम्बानी के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही कर सकती है। हालांकि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दिवालियापन की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही ठहराते हुए कार्यवाही का आदेश जारी किया है। 

बैंक गारंटरों से वसूल सकते हैं अपना पैसा 

गौरतलब है कि कर्ज लेने वाला व्यक्ति अपने दोस्तों या करीबी रिश्तेदारों को गारंटर बनाता है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लोन देने के वक्त कर्ज लेने वाले और गारंटर में कोई खास अंतर नहीं होता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि ईएमआई कर्ज लेने वाले के खाते से कटती है। अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर किस्त नहीं चुकाता है तो एक निश्चित समय के बाद बैंक गारंटर को पकड़ता है।  

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