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भाई की नौकरी: U.P. के बेसिक शिक्षा मंत्री घिरे

Shikha Awasthi 24-05-2021 19:03:24 14 Total visiter


भाई की एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी को घेरने का एक और मौका विपक्ष के हाथ लग गया है। नियुक्ति के पूरे मामले की जांच के साथ ही विपक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ऐसे मंत्री को हटाने की भी मांग की है। पूरा मामला कुछ इस प्रकार है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई डा. अरुण द्विवेदी राजस्थान की वनस्थली विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। इधर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने मनोविज्ञान संकाय में एसोसिएट प्रोफेसर के दो पदों के लिए आवेदन मांगे। इनमें से एक पद पिछड़ा वर्ग तथा दूसरा पद अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित था। जाहिर सी बात है कि पिछड़े वर्ग के पद के लिए डा. द्विवेदी आवेदन नहीं कर सकते थे इसलिए अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित पद पर आवेदन किया। नियुक्ति के लिए 150 आवेदन किये गये।

- मेरिट के स्थान पर देखा जाए तो पहले अरुण द्विवेदी दूसरे नम्बर थे लेकिन साक्षात्कार, शैक्षणिक व अन्य अंकों के आधार पर वह पहले नम्बर पर पहुंच गये और उनकी नियुक्ति हो गयी। 21 मई को जब वह ज्वाइनिंग के लिए पहुंचे तो उन्हें बधाइयां दी जाने लगीं लेकिन इसके अगले ही दिन से सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चा थी। उसी के आधार पर विपक्ष को सरकार को घेरने का हथियार मिल गया।

कहा गया कि जब अरुण द्विवेदी वनस्थली विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर थे तो उनकी आय इतनी कम कैसे हो सकती है कि अल्प आय वर्ग के तहत वह आ गये। इस सम्बन्ध में सीधे अरुण द्विवेदी या उनके भाई बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री का पक्ष तो नहीं आ सका लेकिन यह चर्चा जरूर आयी कि उन्होंने कुछ समय पहले यह पद छोड़ दिया था। अब सवाल यह उठता है कि उन्होंने आखिर यह पद क्यों छोड़ दिया? क्या अपनी आय कम दिखाने के लिए ऐसा किया गया? इसके साथ ही यह भी कहा गया कि आय प्रमाण पत्र वर्ष २०१९ का है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वर्ष २०१९ के बाद से वर्ष २०२१ तक उनकी आय उतनी ही रही या इसमें कोई वृद्धि हुई अथवा कमी आयी। फिर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस प्रमाणपत्र को कैसे मान लिया। क्या यह नहीं सोचा गया कि वर्ष २०२१ में नये प्रमाणपत्र की आवश्यकता है।

आपको बता दें कि अल्प आय वर्ग में वही पात्र माना जाता है जिसके परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये से अधिक न हो। इसके अलावा कृषि भूमि पांच एकड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर वह व्यक्ति शहरी क्षेत्र में निवास करता है तो उसके आवासीय भूखंड का क्षेत्रफल ९०० वर्गफुट से अधिक नहीं होना चाहिए।
अब जानिए विपक्ष व अन्य लोगों का क्या कहना है-

कांग्रेस की यूपी प्रभारी और महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि संकटकाल में यूपी सरकार के मंत्री आम लोगों की मदद करने से तो नदारद दिख रहे हैं लेकिन आपदा में अवसर हड़पने में पीछे नहीं है। प्रियंका गांधी ने कहा, बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई नौकरी पा गये और लाखों युवा यूपी में रोजगार की बाट जोह रहे हैं। प्रियंका गांधी ने तंज कसते हुए कहा, ये वही मंत्री हैं जिन्होंने चुनाव ड्यूटी में मारे गये शिक्षकों की संख्या को नकार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या वह इस पर ऐक्शन लेंगे।

आरटीआई ऐक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने की बात कही है। उनका कहना है कि जो व्यक्ति पहले से वनस्थली विद्यापीठ में असिस्टेंट प्रोफेसर हो, वह अल्य आय वर्ग का कैसे हो सकता है।

आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि मंत्री को यह पता है कि भाई को नौकरी कैसे दी जाती है। वह भाई जो पहले से ही नौकरी में है वह आर्थिक रूप से कमजोर कैसे माना जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने सत्ता का दुरुपयोग करके गरीबों के आरक्षण कोटे का दुरुपयोग किया है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

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