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किसान आंदोलन: गाजीपुर बॉर्डर पर फिर सक्रिय हुए किसान, सरकार का पुतला जलाकर मनाया 'काला दिवस'

Shikha Awasthi 26-05-2021 13:04:59 14 Total visiter


नई दिल्ली। पिछले छह महीने से देश की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर डाटे किसान 26 मई को एक बार फिर सक्रिय हो गए। संयुक्त किसान मोर्चा की अपील पर कृषि कानूनों के विरोध में बुधवार को देशभर में किसान 'विरोध दिवस' मना रहे हैं। इसके तहत किसानों ने गाड़ियों में काले झंडे लगाकर सरकार के विरोध में पुतले फुक कर विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर भी किसान एकत्रित हुए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आज किसानों को बॉर्डर पर इकट्ठा करके पुतला जलाया वहीं हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। 

किसानों ने मनाया बुद्ध पूर्णिमा

गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दिल्ली की सीमाओं पर 6 महीने पूरा होने पर और केंद्र की मोदी सरकार को 7 साल पूरा होने पर सयुंक्त किसान मोर्चा ने इस दिन मोदी सरकार के विरोध स्वरूप काले झंडे लगाने का फैसला किया। हालांकि 26 मई को ही भगवान बुद्ध के जन्म, निर्वाण और परिनिर्वाण का उत्सव बुद्ध पूर्णिमा भी है, इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने सभी मोचरें और धरनों पर अपने-अपने तरीके से बुद्ध पूर्णिमा मनाई।

प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील

बॉर्डर पर बैठे किसान नेता लगातार देशभर के पधाधिकारियों के संपर्क में हैं। लगातार लोगों से इस बात की अपील की जा ही है सभी जगहों पर ये सुनिश्चित किया जाए कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखा जाए। हालांकि बॉर्डर पर किसान इस बात पर ध्यान रखते नजर आए कि किसान कोरोना नियमों का पालन करे। 

नए सिरे से होगी 'किसान क्रांति' : राकेश टिकैत 
 
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ता और नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से करते हुए कहा कि सरकार को कृषि कानून वापस लेने होंगे। आज देशभर में लोग सरकार के खिलाफ काला झंडा हाथों में लेकर खड़े हुए हैं। एक बार फिर सभी किसानों ने इस बात को दोहराया कि जब तक किसानों की मांगे नहीं मानी जाएगी, तब तक किसान इसी तरह दिल्ली की सीमाओं पर बैठे रहेंगे। साथ ही टिकैत ने यह भी कहा कि किसान क्रांति अब नए सिरे से होगी।

बता दें कि तीन नए अधिनियमित कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम,2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 पर किसान सशक्तिकरण और संरक्षण समझौता को लेकर सरकार का विरोध कर रहे हैं।

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