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अभिव्यक्ति की आजादी पर अब रहेगी सरकार की नजर, IPC  की धारा में होगा शामिल 

Shikha Awasthi 26-05-2021 15:04:13 9 Total visiter


नई दिल्ली। भारत सरकार पिछले काफी समय से अभिव्यक्ति की आजादी के नियम पर लंबे समय से नजर बनाए हुए थी। ऐसा इस लिए क्योकि देश में समय-समय पर अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दे को लेकर बहस होती रहती है। अब खबर है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) में 'भड़काऊ बयान' को भी जल्द शामिल किया जा सकता है। आईपीसी में सुधार के लिए काम करने वाली एक पैनल 'अभिव्यक्ति और भाषणों से जुड़े अपराधों' पर अलग से धारा का प्रस्ताव रखने जा रही है। इस दौरान पैनल भड़काऊ बयान की एक कानूनी परिभाषा तैयार करने की कोशिश करेगी। हाल ही में हाई कोर्ट में इससे जुड़े मामले पर सुनवाई हुई थी।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईपीसी में अभी तक भड़काऊ बयान की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। ऐसे में अपराध संबंधी कानून में सुधार को लेकर गृह मंत्रालय की तरफ से गठित की गई कमेटी पहली बार इसे परिभाषित करने की कोशिश कर रही है। कहा जा रहा है कमेटी इस मामले में जल्द ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने की थी सुनवाई 

हालही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवी मुंबई के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को खारिज कर दिया था। उस दौरान कहा गया था कि एक अत्याधिक और कठोर दृष्टिकोण को भड़काऊ भाषण नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कर्णिक की डिवीजन बेंच ने कहा था कि हमारे लोकतंत्र में अपने विचारों को सामने रखना सुरक्षित और पोषित है। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता का केवल दृष्टिकोण कठोर होने के चलते उसे भड़काऊ बयान नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह दूसरा दृष्टिकोण पेश कर रहा था।

राजद्रोह की धारा को भी मिली है चुनौती

बता दें कि बीते 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह से जुड़ी एक याचिका पर सुनावाई की अनुमति दी थी। इस याचिका में आईपीसी की धारा 124A की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। इस मामले में याचिकाकर्ता दो पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा और कन्हैया लाल शुक्ला थे। फिलहाल मामले में शामिल पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के चलते राजद्रोह का ममला चल रहा है।

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