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जानिए किस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दुःख, कहा- 'हम घड़ी की सुइयों को पीछे नहीं ले जा सकते'

Shikha Awasthi 26-05-2021 18:53:19 19 Total visiter


नई दिल्ली। साल 2020 में दिल्ली में एक छह साल के बच्चे के साथ यौन शोषण और कुकर्म का मामला सामने आने से पूरे राज्य में हडकंप मच गया था। इसी मामले में बुधवार (26 मई) को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक फैसला दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन शोषण के छह साल के पीड़ित को छह लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने पीड़ित बच्चे को मुआवजा देते हुए कहा कि सिस्टम इस अपराध को तो नहीं पलट सकती लेकिन, वह अपराधी को सजा देने के अलावा पीड़ित को वित्तीय मदद दे सकती है। जिससे उसे मनोवैज्ञानिक सुरक्षा या सशक्तिकरण मुहैया कराई जा सके। 

निचली अदालत के फैसले को किया रद्द    

बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित लड़के को 50 हजार रुपये का अंतरिम मुआवजा देने के निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मुआवजा राशि छह लाख रुपये तक बढ़ा दी और कहा कि पहले का मुआवजा बहुत कम था। जस्टिस अनूप जयराम भम्भानी ने कहा कि पीड़ित को दिया जाने वाला मुआवजा बढ़ाते हुए कोर्ट की कोशिश उतनी वित्तीय भरपाई करने की तो होनी चाहिए जितनी इस अपराध की क्षतिपूर्ति के लिए आवश्यक है। 

कोर्ट ने आगे कहा कि बच्चा शारीरिक और मानसिक सदमे से गुजर रहा है और उसके मन को भावनात्मक चोट पहुंची है। चूंकि हम घड़ी की सुइयों को पीछे नहीं ले जा सकते और न ही अपराध को बदल सकते है इसलिए कोर्ट अपराधी को सजा देने और पीड़ित को वित्तीय मुआवजा देकर मनोवैज्ञानिक सुरक्षा और सशक्तिकरण की भावना पैदा करने का काम कर सकती है। 

क्या है पूरा मामला

छह साल के बच्चे से 2020 में उसके ही घर में उसके अंकल ने कथित तौर पर यौन शोषण और कुकर्म किया था और आरोपी पर अभी मुकदमा चल रहा है।  कोर्ट को बताया गया कि पीड़ित बच्चा बहुत ही गरीब परिवार से आता है और उसकी मां घरेलू सहायिका का काम करती है और पिता बीमार हैं और परिवार की मासिक आमदनी करीब 6,000 रुपए है जिसमें चार सदस्यों को गुजारा करना होता है।

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