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नदी में शव बहाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कसा तंज, बोले- 'पता नहीं इसे दिखाने वाले चैनल पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं' 

Shikha Awasthi 31-05-2021 17:09:02 9 Total visiter


नई दिल्ली। संवेदनशील और असहज कर देने वाली खबरों को लेकर राज्य सरकारों की ओर हालिया प्रतिक्रिया को देखते सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अदालत ने सुनवाई करते हुए तंज कसा। कोर्ट ने कोरोना से मर रहे लोगों का गरिमापूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार न हो पाने पर सुनवाई करते हुए नदियों में शव बहाए जाने पर टिप्पणी की। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, "हमने एक वीडियो देखा है कि नदी में शव को बहाया जा रहा है। हमें नहीं पता कि जिस चैनल ने इस वीडियो को दिखाया, उसके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ या नहीं।"

वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने उठाया मसला

एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने देश में कोविड मैनेजमेंट और वैक्सीनेशन पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहीं के दौरान शवों के सम्मानपूर्ण अंतिम संस्कार का मसला उठाते हुए कहा कि, "यह देखा जा रहा है कि कभी बीमारी के डर से, तो कभी आर्थिक कारण से लोग शवों का सही तरीके से अंतिम संस्कार नहीं कर रहे। कोर्ट को इस बारे में भी राज्य सरकारों से जवाब तलब करना चाहिए। उन्हें निर्देश देना चाहिए कि विद्युत शवदाह गृह की संख्या बढ़ाई जाए। दाह संस्कार के समय होने वाले वाली धार्मिक औपचारिकताओं को भी कुछ इस तरह से पूरा किया जाए, जिससे प्रक्रिया पूरी भी हो और जल्दी भी निपट सके।"

इसके जवाब में जजों ने कहा कि ऐसा एक मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। आगे इस पर विचार किया जाएगा। 3 जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के दौरान पिछले दिनों यूपी में नदी में बहाए जा रहे शव के वीडियो की चर्चा कर की। उन्होंने कहा कि हो सकता है इस वीडियो को दिखाने वाले चैनल पर मुकदमा दर्ज हो गया हो।

कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई थी नाराजगी

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की इसी बेंच ने सोशल मीडिया में कोरोना के इलाज के लिए मदद मांग रहे लोगों पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था, "अगर सोशल मीडिया पर कोरोना के इलाज से जुड़ी अपनी तकलीफ रख रहे किसी व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज किया गया या उसे परेशान किया गया तो, यह कोर्ट उसे अपनी अवमानना की तरह देखेगा। राज्यों के डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि इस तरह के लोगों को और अधिक परेशान न किया जाए।"

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