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बंगाल में सियासी घमाशन, राज्यपाल धनखड़ ने सीएम ममता पर लगाया झूठ बोलने का आरोप

Shikha Awasthi 01-06-2021 15:36:09 16 Total visiter


कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच तनाव हर बीतते दिन के साथ बढ़ता ही जा रहा है। सोमवार को बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंदोपाध्याय को केंद्र के बुलावे के बाद रिटायर कर मुख्यमंत्री ममता ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त करने का मामला अभी शांत नही हुआ था कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी पर झूठ बोलने का आरोप लगाकर ममले को हवा दे दी है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झूठा करार दे दिया। उन्होंने कहा कि यास तूफान से हुए नुकसान के रिव्यू के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में बैठक की। इस बैठक में ममता नहीं पहुंचीं। बैठक से गायब होने की जो वजह उन्होंने बताई, वो झूठी है। 

क्या बोले धनखड़? 
 
धनखड़ ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा कि, ममता बनर्जी ने 27 मई को रात सवा ग्यारह बजे मुझे मैसेज किया था। उन्होंने कहा था कि क्या मैं आपसे अभी बात कर सकती हूं? अर्जेंट है। ममता ने फोन पर इस बात के संकेत दिए कि पीएम की मीटिंग में वो और उनके अधिकारी नहीं जाएंगे। जनता की सेवा के ऊपर उनका अहंकार हावी हो गया। झूठी बातों से मजबूर होकर मैंने पूरा रिकॉर्ड सामने रख दिया है। 

28 मई को पीएम मोदी ने किया था बंगाल का दौरा 

बता दें कि चक्रवात तूफान यास से हुए नुक्सान का आकलन करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी 28 मई को ओड़िसा और पश्चिम बंगाल के दौरा किया था। इस बैठक में ममता देर से पहुंची थी। तब बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंधोबाध्याय भी नहीं पहुंचे थे। इसके बाद अलापन को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया था। पर यहां से ममता और केंद्र के बीच तकरार बढ़ गई। अलापन को मुख्य सचिव पद से रिटायर कर ममता ने उन्हें अपना प्रमुख सलाहकार बना दिया। इसके बाद केंद्र ने कहा कि वो अलापन को चार्जशीट भेजेगा। भले ही वो रिटायर हो गए हों, लेकिन कार्रवाई की जाएगी।

शुभेंदु को लेकर जताई थी आपत्ति 

पीएम की इस बैठक के बाद ममता ने पीएम को पत्र लिखकर मीटिंग में शुभेंदु अधिकारी को बुलाने पर आपत्ति जताई थी। ममता ने पीएम को पत्र लिखते हुए कहा था कि, आपने बैठक का स्वरूप बदल दिया। आपने गवर्नर और कुछ केंद्रीय मंत्रियों को बैठक में बुलाया। इसका मैंने विरोध नहीं किया। लेकिन, आपने बैठक में अपनी पार्टी के एक स्थानीय विधायक को बुला लिया। इसका मुझे कोई औचित्य नजर नहीं आता। पीएम और सीएम की बैठक में एक लोकल विधायक का होना स्वीकार नहीं किया जा सकता है। 

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