इमेज टुडे - ज़िन्दगी में भर दे रंग - समाचारों का द्विभाषीय पोर्टल

देशभर में 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए आज से शुरू हो रहा रजिस्ट्रेशन      ||      लखनऊ: मेदांता अस्पताल में मरीजों की मदद के लिए प्रियंका गांधी ने भेजा ऑक्सीजन का टैंकर      ||      भारत में कोरोना की बिगड़ती स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बढ़ाया मदद का हाथ      ||      असम में आए भूकंप पर प्रियंका गांधी ने कहा- असम के लोगों के लिए मेरा प्यार और प्रार्थनाएं      ||      PM CARES से DRDO खड़े करेगा 500 ऑक्सीजन प्लांट      ||     

अर्थव्यवस्था को लेकर इस पूर्व वित्त मंत्री ने साधा केंद्र पर निशाना, बोले- मोदी सरकार अपनी गलतियां माने 

Shikha Awasthi 01-06-2021 16:52:48 9 Total visiter


नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2020-21 को भारतीय अर्थव्यवस्था को अंधकारमय करार दिया है। उन्होंने अर्थव्यवस्था में 2020-21 के दौरान 7.3 प्रतिशत की गिरावट होने पर मंगलवार को चिंता प्रकट करते हुए कहा कि अगर 2021-21 में ऐसी स्थिति से बचना है, तो सरकार को अपनी गलतियां स्वीकार करते हुए विपक्ष एवं अर्थशास्त्रियों की सलाह सुननी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अर्थव्यवस्था की लिहाज से 2021-21 को पिछले चार दशक का 'सबसे अंधकारमय' साल करार दिया और यह आरोप भी लगाया कि कोरोना महामारी के साथ ही सरकार के अकुशल एवं अक्षम आर्थिक प्रबंधन हालात और बिगड़ गए। 

चिदंबरम ने कहा कि 2018-19 में जीडीपी 140,03,316 करोड़ थी। 2019-20 में यह 145,69,268 करोड़ रुपये थी और 2020-21 में यह घटकर 135,12,740 करोड़ रुपये हो गई। यह देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को बताता है। चिदंबरम ने कहा, 'पिछले साल जब कोरोना महामारी की पहली लहर धीमी पड़ती नजर आई, तो वित्त मंत्री और मुख्य आर्थिक सलाहकार अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की बातें करने लगे। हमने कहा था कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन पैकेज की मजबूत मदद चाहिए।' उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद एक लाख रुपये से नीचे चला गया है।

केंद्र की गलत नीतियों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशान साधते हुए कहा कि, निश्चित तौर पर कोरोना महामारी का अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से असर पड़ा है, लेकिन अकुशल और अक्षम आर्थिक प्रबंधन ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को और बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा, 'कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। इसमें पहली लहर की तुलना में संक्रमण और मौतों की संख्या की लिहाज से ज्यादा नुकसान हुआ है। अगर 2020-21 की तरह साल 2021-22 को नहीं होने देना है तो सरकार को जागना चाहिए, अपनी गलतियां स्वीकार करनी चाहिए, अपनी नीतियां बदलनी चाहिए तथा विपक्ष एवं अर्थशास्त्रियों की सलाह स्वीकार करनी चाहिए

वित्त वर्ष 2020-21 में आई 7.3 प्रतिशत की गिरावट

बता दें कि देश की अर्थव्यवस्था में 2020-21 में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी है जो गिरावट के बारे में पहले के विभिन्न अनुमानों से कम है। इसका कारण कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से ठीक पहले चौथी तिमाही में वृद्धि दर का कुछ बेहतर रहना है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 1.6 प्रतिशत रही।  

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :