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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा वैक्सीन पर हिसाब, पूछा- बाकी लोगों का कैसे और कब वैक्सीनेशन? 

Shikha Awasthi 02-06-2021 19:09:46 12 Total visiter


नई दिल्ली। बुधवार को देश की सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह अब कोविड-19 वैक्सीन की खरीद के संबंध में विस्तृत विवरण कोर्ट को मुहैया कराए। न्यायालय ने केंद्र से कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक V तीनों की वैक्सीन के खरीद के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने जो विवरण मांगा है उसमें तीनों ही वैक्सीन की खरीद की तारीख, हर तारीख में खरीदी गई वैक्सीन की संख्या और वैक्सीन की सप्लाई की संभावित तारीख की जानकारी मांगी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आदेश देते हुए यह भी पूछा कि वह 1, 2 और 3 चरण में शेष आबादी का टीकाकरण कैसे और कब करेगी। अदालत ने इसकी भी पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि वह ब्लैक फंगस में के इलाज के लिए उपयोग में लाई जाने वाली दवाओं की  उपलब्धता बनाए रखने के लिए वह क्या कदम उठा रही है। कोविड-19 से जुड़े मुद्दे पर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट की खंडपीठ की ओर से यह फैसला जारी किया है। 

वैक्सीनेशन पर केंद्र का रवैया 'मनमाना' : सुप्रीम कोर्ट

18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण की नीति पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की नीति को "मनमाना और तर्कहीन" बताया। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में 18-44 आयु वर्ग के लोग न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु सहित संक्रमण के गंभीर प्रभावों से पीड़ित हो रहे हैं। अदालत ने महामारी की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि कोरोना महामारी ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां इस कम आयु वर्ग को भी टीकाकरण की आवश्यकता है। हालांकि, अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक आधार पर विभिन्न आयु समूहों के बीच प्राथमिकता को बरकरार रखा जा सकता है। 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "इसलिए, 18-44 आयु वर्ग में व्यक्तियों के टीकाकरण के महत्व के कारण, पहले दो चरणों में केंद्र सरकार की खुद टीकाकरण कराने नीति को बदलकर करे और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों की ओर से 18-44 वर्ष के बीच के व्यक्तियों के लिए निजी अस्पताल में भुगतान कर टीकाकरण प्रथम दृष्टया, मनमानी और तर्कहीन है।"

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई को विभिन्न राज्यों की ओर से कोरोना वायरस रोधी टीकों की खरीद के लिए वैश्विक निविदाएं जारी करने के बीच केंद्र से पूछा था कि उसकी टीका-प्राप्त करने की नीति क्या है। इसके साथ ही उसने टीकाकरण से पहले कोविन ऐप पर अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाने की जरूरत पर भी सवाल उठाए और कहा कि नीति निर्माताओं को जमीनी हकीकत से वाकिफ होना चाहिए तथा ‘डिजिटल इंडिया’ की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी देश की ग्रामीण जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए की थी। 

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