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योगी ही रहेंगे यूपी के सीएम

Shikha Awasthi 04-06-2021 17:49:40 10 Total visiter


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री फिलहाल योगी आदित्यनाथ ही बने रहेंगे। लगभग छह महीने बाद होने वाले विधान सभा चुनाव की घोषणा को देखते हुए भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व भी योगी को नहीं बदलना चाहता है लेकिन यह तब तक ही है जब तक कि दिल्ली दरबार इसे निजी तौर पर प्रतिष्ठा और दूरी का प्रश्न न बना ले जिसके आसार कम ही हैं। क्या दिल्ली दरबार इस समय यह जोखिम उठायेगा, यही सवाल योगी के विरोधियों को परेशान कर रहा है।

अब आपको बताते हैं कि योगी क्यों बने रहेंगे। एक तो भाजपा के पास इस समय कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो छह महीने में कोई चमत्कार कर सकता हो। जून शुरू हो गया है और दिसम्बर से जनवरी के बीच चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है। चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सरकार कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकती और उसके हाथ बंध चुके होंगे क्योंकि आचार संहिता लगने के कारण एक डीएम भी बदलना होगा तो पहले चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।

यह चर्चा पिछले कई दिनों से थी कि केशव मौर्य को उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। तो क्या केशव मौर्य अध्यक्ष पद बड़े मन से ग्रहण कर लेंगे। यह तभी सम्भव है जब उन्हें अभी से भरोसा दिया जाए कि अगली बार अगर भाजपा जीतती है तो मुख्यमंत्री उन्हें ही बनाया जाएगा। अब अगर स्वतंत्र देव सिंह को अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो जातीय समीकरण के हिसाब से क्या कुर्मी समाज इसे अपने सम्मान के लिहाज से नहीं देखना शुरू करेगा और यह बात जगजाहिर है कि प्रदेश में न केवल कुर्मियों की संख्या मौर्य से अधिक है बल्कि मौर्य वर्ग की अपेक्षा वे अधिक समृद्ध भी हैं। ऐसे में अन्य दलों की निगाहें उन्हें तरह-तरह से लुभाने में लग जायेंगी। अब अगर स्वतंत्र देव सिंह को मंत्रिमंडल में लिया जाता है तो इससे सरकार को क्या फायदा होगा, यह कोई भी सोच सकता है।

एक बात जो बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है कि वह यह है कि स्वतंत्र देव सिंह की बहुत महत्वाकांक्षाएं सार्वजनिक नहीं हुई हैं। इसीलिए कहा जाता है कि उनके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अच्छी ट्यूनिंग है लेकिन अध्यक्ष पद पर अगर केशव प्रसाद मौर्य बैठ जाते हैं तो क्या दोनों के बीच ट्यूनिंग अच्छी रह पायेगी क्योंकि इनकी ट्यूनिंग तो उसी दिन से असहज बतायी जाती है जब पंचम तल पर नेम प्लेट को लेकर चर्चा कई दिनों तक तैरती रही थी। ऐसे में कहीं यह न हो जाए कि भाजपा सरकार और संगठन नामक दो पहियों में सामंजस्य के अभाव में गाड़ी को जिस गति से आगे बढऩा चाहिए, वह न बढ़ पाये।
योगी को दम्भी कहा जा सकता है। अहंकारी माना जा सकता है लेकिन योगी की निजी छवि सुरक्षित है। लगभग साढ़े चार साल के शासनकाल में उन पर भ्रष्टाचार का एक भी मामला प्रकाश में नहीं आया है और वह कट्टरवादी हिन्दू हैं जिन्हें टोपी पहनने से भी ऐतराज है। यह छवि भाजपा से ज्यादा आरएसएस में उन्हें मुख्यमंत्री बनाये रखने में एक सुरक्षा कवच की तरह होगा। इसलिए यह किया जा सकता है कि नौकरशाहों पर लगाम कसकर कुछ ऐसे फैसले किये जाएं जिससे हिन्दू जनमानस खुश हो जाए।

अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि भाजपा नेतृत्व से चूक कहां हो गयी। दरअसल चूक यह हो गयी कि भाजपा नेतृत्व का पूरा फोकस लखनऊ से गोरखपुर और लखनऊ से इलाहाबाद तक रहा लेकिन एक तरफ पूरा पश्चिमांचल इस सामंजस्य से अछूता रहा और दूसरी तरफ रूहेलखंड छूट गया। इस चूक को सरकार के गठन के एक से दो साल के भीतर ठीक कर लेना था और पश्चिम के किसी बड़े नेता को अहम जिम्मेदारियां दी जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा न हो सका। अब जबकि पश्चिम में किसान आंदोलन चल रहा है तो क्या उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

एक दूसरी अहम बात यह है कि वर्ष 2022 में केवल यूपी में ही चुनाव नहीं होने हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा और मणिपुर में भी चुनाव होने हैं। तो क्या आज के समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाना एक समझदारी से भरा कदम होगा और इसका असर क्या अन्य राज्यों के जातीय समीकरण पर नहीं पड़ेगा। फैसला आपको करना है।

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