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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा रद्द होने बाद इस बात से परेशान हुए अभिभावक, बोर्ड ने दिया जवाब

Shikha Awasthi 05-06-2021 17:59:23 9 Total visiter


नई दिल्ली। कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते पहले देश में सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षाएं कैंसिल कर दी गई थी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12वीं की परीक्षा भी रद्द करने ला ऐलान कर दिया। ऐसे में अब ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन ने सीबीएसई से बच्‍चों से लेकर जमा कराई गई परीक्षा फीस वापस करने की मांग की है। 

आईपा ने पत्र लिखकर की फीस माफ करने की मांग 

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन (आईपा) ने सीबीएसई को पत्र लिखते हुए हुआ कि, सत्र 2020-21 के लिए स्‍कूलों ने छात्रों से परीक्षा शुल्‍क जमा कराया था जिसे अब परीक्षा न होने की स्थिति में वापस किया जाए। आईपा के अध्‍यक्ष एडवोकेट अशोक अग्रवाल का कहना है कि पिछले मार्च से पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस दौरान बीमारी और लॉकडाउन के साथ लगे तमाम प्रतिबंधों के कारण अभिभावकों की इनकम पर भी काफी बुरा असर पड़ा है।

गौरतलब है कि आईपा ने पिछले साल अक्‍टूबर में भी परीक्षा रद्द हो जाने के बाद शुल्‍क को लेकर केंद्र और राज्‍य सरकारों से माफी की मांग की थी। इतना ही नहीं इसे लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी जिसके बाद सीबीएसई को शुल्‍क माफ करने के लिए प्रतिवेदन भी दिया था लेकिन सीबीएसई की ओर से माफी से इनकार करने के बाद अभिभावकों ने परीक्षा फीस जमा की।

आईपा ने फीस माफी को लेकर दिया तर्क

आईपा ने सीबीएसई को लिखे अपने पत्र में फीस में को लेकर कहा कि, अब जबकि दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं तो छात्रों से लिया गया शुल्‍क वापस किया जाना चाहिए। आईपा इसे छात्रों का नैतिक और विधिक अधिकार मानती है। ऐसे में इस सत्र की परीक्षा फीस जल्‍दी से जल्‍दी वापस की जाए। आईपा की ओर से इस पत्र की कॉपी प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री की भी दी गई है। आईपा का मानना है कि देश में ऐसे कितने ही अभिभावक हैं जिन्‍हें पैसा कर्ज लेकर स्‍कूलों की फीस जमा करनी पड़ी है। अब जबकि केंद्र सरकार और सीबीएसई ने परीक्षाएं न कराने का फैसला किया है तो छात्रों के हित से संबंधित और भी फैसले लिए जाएं।

सीबीएसई ने दिया जवाब

फीस माफी की मांग पर सीबीएसई ने कहा कि छात्रों से लिया गया परीक्षा शुल्‍क सिर्फ परीक्षाओं के लिए नहीं होता बल्कि इसका इस्‍तेमाल परीक्षाओं की तैयारी से लेकर छात्रों के परीक्षा परिणाम बनाने, डॉक्‍यूमेंट बनाने, 50 साल तक छात्र का रिकॉर्ड रखने आदि सभी कामों के लिए किया जाता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने पर फीस वापसी की मांग ठीक नहीं है। परीक्षाएं भले ही रद्द हुई हैं लेकिन बाकी सभी काम तो होंगे। लिहाजा इस संबंध में कोई फैसला नहीं किया गया है।

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