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दिल्ली के अस्पताल में मलयालम भाषा के उपयोग पर रोक, कांग्रेस ने जताई आपत्ति 

Shikha Awasthi 06-06-2021 11:23:43 8 Total visiter


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जीपी पंत अस्पताल इन दिनों सुर्ख़ियों में बना हुआ है. वजह है अस्पताल द्वारा जारी किया गया एक विवादित फरमान जिसमें अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ को हिंदी व अंग्रेजी के अलावा किसी अन्य भाषा का उपयोग करने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है. दरअसल कुछ दिन पहले अस्पताल को एक शिकायत मिली थी जिसमें कहा गया था कि नर्सिंग स्टाफ अपने राज्य या लोकल भाषा में बात करते हैं. जिसके कारण मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता हैं. इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जीबी पंत अस्पताल ने बीते दिन यानी 5 जून को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें कहा गया है कि ऐसी शिकायत मिली है कि अस्पताल के वर्किंग प्लेस पर कम्युनिकेशन के लिए मलयालम भाषा का उपयोग किया जा रहा है. जबकि अधिकतर मरीज, और अन्य लोग इस भाषा को नहीं जानते हैं, जिसके कारण वे असहाय और असुविधा महसूस करते हैं. इसलिए सभी नर्सिंग स्टाफ को निर्देश दिया जाता है कि वे कम्युनिकेशन की भाषा के रूप में सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ही उपयोग करें. अन्यथा उन पर सीरियस एक्शन लिया जा सकता है.

वहीं अब इस मामले को लेकर कांग्रेस संसद राहुल गांधी का बयान भी सामने आया है. राहुल ने कहा है कि मलयालम भाषा भी उतनी ही भारतीय भाषा है जितनी की कोई अन्य भाषा. भाषाओं के नाम पर भेदभाव बंद किया जाना चाहिए. इसके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मामले को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, 'ये आश्चर्यजनक है कि भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में एक सरकारी संस्थान अपनी नर्सों से कह सकता है कि वे उन लोगों से भी अपनी मातृभाषा में बात न करें जो उन्हें समझ सकते हैं. ये बिलकुल आस्वीकार्य है. वहीँ केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखते हुए कांग्रेस सांसद और पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के सी वेणुगोपाल ने कहा मलयालम नर्सों के लिए मातृभाषा है और ऐसा सर्कुलर उनके साथ बहुत ही विभेदकारी है. उनके मूलाधिकार का भी उल्लंघन है. इस सर्कुलर को जल्द से जल्द वापस लिया जाना चाहिए. आपको बता दें की दिल्ली के जीपी पंत अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ में कई ऐसे लोग हैं जो केरल से हैं जिनकी भाषा मलयालम है. 

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