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जानिये, योगी कैसे करेंगे यूपी की ओवरहालिंग

Shikha Awasthi 07-06-2021 18:50:56 8 Total visiter


लखनऊ: भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बगैर कोई जोखिम उठाये गेंद योगी के पाले में डाल दी है कि उनका मन जैसे हो गेंद खेलें. यानी कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जो संकेत मिले हैं, उनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि यूपी की सत्ता को लेकर पिछले कुछ अरसे से छायी धुंध छट रही है या यह भी कहा जा सकता है कि छंट चुकी है. हालांकि आपको याद होगा कि जब सारे चैनल कयासों पर बहस कर रहे थे तभी हमने साफ बात में बता दिया था कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी ही बने रहेंगे. जो लोग योगी को हटा रहे थे वे अब अपनी फेस सेविंग में लग गये हैं. अब तो पूरी तरह से साफ हो गया है कि अगला विधान सभा चुनाव योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में ही लड़ा जाएगा.

भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह ने मंत्रिमंडल में फेरबदल का निर्णय सीएम योगी पर छोड़कर भले ही उनकी निरंतरता और सीएम के निर्णयों में कोई दखलंदाजी न करने पर मुहर लगा दी हो. लेकिन राजनीति में निर्णयों की स्वतंत्रता की बातें केवल कहने भर की होती हैं. अब अगर मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो जान लीजिए, इसका इशारा कहीं न कहीं से मिला जरुर होगा वरना इस समय योगी खुद क्यों मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहेंगे. इस समय उनके स्तर पर ऐसा करने का कोई औचित्य नहीं बनता है.

एक बात और गौर करने लायक है वह यह कि भले ही संघ के इशारे पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने योगी को अभयदान दे दिया हो लेकिन इसका आशय यह कतई नहीं मानना चाहिए कि योगी ने चुनौतियों से भी पार पा लिया है. राजनीति में खुली चुनौतियों से ज्यादा ढंकी-छुपी चुनौतियां होती हैं. यह ढकी छुपी चुनौतियां ज्यादा बड़ा घाव करती रहती हैं जो दूसरों को दिखायी नहीं देता है. इसलिए एक चतुर राजनीतिज्ञ अलग-अलग रणनीति अपनाकर दोनों तरह की चुनौतियों से पार पाकर आगे की सफलता की कहानी लिखता है. देखते हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसमें कितना सफल होते हैं.

योगी के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यह है कि विपक्ष पूरी तरह से बिखरा हुआ है और इस विधान सभा चुनाव तक फिलहाल तो गठबंधन की दूर-दूर तक संभावना नजर नहीं आती और दूसरे विपक्ष के पास मुलायम सिंह यादव और कांशीराम जैसा कोई नेता नहीं है जो जरूरत पड़े तो गांव-गांव साइकिल से भी पहुंच जाये. ऐसे में योगी समर्थक यह कहकर खुश हो सकते हैं कि हमारी सौ सीटें भी घट जाएं तो भी बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पास ही रहेगा लेकिन उन्हें यह भी समझ लेना चाहिए कि राजनीति हमेशा अनिश्चितता का खेल होती है. सफलता का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कोई नहीं जानता और बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित भी ऐन मौके पर धराशायी हो जाते हैं. इसके साथ ही राजनीति में एक स्थापित धारणा है कि जब आप बढ़ नहीं रहे होते हैं तो घट रहे होते हैं जिसका गणित लगाना बेहद मुश्किल होता है.

एक बड़ी अहम बात की ओर हम आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं वह यह कि पार्टी में योगी विरोधियों का सबसे बड़ा आरोप यही है कि वह नौकरशाही पर आश्रित हैं. नौकरशाही बेलगाम हो गयी है और कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहें हैं. अच्छा ये बताइये कि किस सीएम के समय नौकरशाही पर ऐसे आरोप नहीं लगे. अब देखना यह होगा कि नौकरशाहों से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग क्या मेरिट के आधार पर दिये गये या सिफारिशों के आधार पर. और अगर सिफारिशों के आधार पर हुए हैं. तो सिफारिश करने वाले कौन हैं और उनकी मनोवृत्ति तथा चरित्र कैसा रहा है.

वैसे आपको एक बात यह भी बता दूं कि अख़बारों और न्यूज चैनलों के जरिये सारा कुछ नौकरशाही पर डालना बड़ा आसान होता है क्योंकि नौकरशाही अख़बारों के दफ्तरों में बैठकर और न्यूज चैनल के रिपोर्टरों से लेकर उनके मालिकों के इर्द-गिर्द घूम-घूमकर अपनी सफाई पेश नहीं करती. हां कुछ नौकरशाह अपवाद स्वरूप जरूर हैं जो मालिकों के साथ टहलते, बैडमिंटन और गोल्फ खेलते हैं. ऐसे नौकरशाहों की बात अगर छोड़ दें तो कितने नौकरशाह बड़े रिपोर्टरों के साथ ग्लासों में लाल परी का नर्तन करते हैं. नौकरशाह तो राजनेताओं की आंखों को पढ़ने में माहिर होते हैं और उन्हें ये समझने में देर नहीं लगती कि राजनीतिज्ञ चाहता क्या है. उसी के आधार पर हर सरकार में वह खुद को गढ़ लेते हैं. जो चतुर राजनेता होते हैं वह ऐसा नौकरशाह तलाश लेते हैं जो नियम-कानूनों का हवाला देकर काम में टालमटोल और अड़ंगेबाजी न करे बल्कि वह काम करने में माहिर हो. इस सरकार में भी कई अफसर ऐसे महत्वपूर्ण पद पर हैं जो काम ही नहीं करते हैं. विभागीय मंत्री तक उनसे परेशान हैं लेकिन सरकार उनको उस महत्वपूर्ण पद से इसलिए नहीं हटा रही है कि कोई दूसरा मंत्री उन्हें लेने को तैयार नहीं है. पता नहीं सीएम योगी तक यह बात पहुंच पायी है या नहीं. सोचिये लखनऊ के डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट सार्वजनिक तौर पर इस कदर भिड़ जायें कि उनका वीडियो वायरल हो जाय तो नौकरशाही को लेकर सवाल तो उठेंगे ही?

तो ऐसे में सवाल यह उठता है फिर होगा क्या ? सीएम योगी पर नौकरशाही को लेकर जो आरोप उनके विरोधियों ने लगाये हैं, उनका मुंहतोड़ जवाब कैसे दिया जाएगा तो अब होगा यह कि बड़े पैमाने पर जिलाधिकारियों से लेकर डिप्टी कलेक्टर पुलिस अधीक्षकों और क्षेत्राधिकारियों के तबादले किये जाएंगे क्योंकि मुख्यमंत्री को अपने विधायकों और संगठन के लोगों को भी तो संतुष्ट करना है. उधर संगठन स्तर पर जिलों के कुछ पदाधिकारी भी बदले जा सकते हैं. लेकिन मुख्यमंत्री योगी के सामने सबसे बड़ी चुनौती तो यह होगी कि वह सब कुछ अगर ठीक कर लेते हैं तो विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर उनकी कितनी चलती है. यानी सीएम योगी को कितना फ्री हैंड भाजपा का शीर्ष नेतृत्व देता है. अब देखते हैं कि क्या सीएम योगी यह इतिहास रच पाते हैं.

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