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देशभर में 18 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए आज से शुरू हो रहा रजिस्ट्रेशन      ||      लखनऊ: मेदांता अस्पताल में मरीजों की मदद के लिए प्रियंका गांधी ने भेजा ऑक्सीजन का टैंकर      ||      भारत में कोरोना की बिगड़ती स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बढ़ाया मदद का हाथ      ||      असम में आए भूकंप पर प्रियंका गांधी ने कहा- असम के लोगों के लिए मेरा प्यार और प्रार्थनाएं      ||      PM CARES से DRDO खड़े करेगा 500 ऑक्सीजन प्लांट      ||     

बात गंभीर है, यह खबर अंत तक जरूर पढ़िए

Shikha Awasthi 08-06-2021 19:06:33 5 Total visiter


लखनऊ : योजनाओं और घोषणाओं के मामलों में हमारी सरकारें इतनी लेटलतीफ हैं कि दर्द से कराहती हुई जनता को जो लाभ तत्काल मिलना चाहिए उनमें बहुत देर हो जाती है। अब केंद्र सरकार को ही ले लीजिए 18 से 44 वर्ष की उम्र के लोगों के टीकाकरण की जिम्मेदारी से अपना मुंह मोड़ते हुए केंद्र ने सारी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी और जब अव्यवस्था और गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष की बयानबाजी के कारण स्थितियां असहज होने लगीं तो सात जून को केंद्र सरकार के स्तर पर घोषणा कर दी गयी कि वैक्सीनेसन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र उठाएगा. न केवल केंद्र सरकार के स्तर पर सभी के लिए वैक्सीन खरीदी जाएगी बल्कि सभी राज्य सरकारों को वैक्सीन मुफ्त मिलेगी। क्या यही घोषणा पहले नहीं की जा सकती थी या फिर केंद्र को विपक्ष की ऐसी बयानबाजियों का कोई अंदाजा नहीं था या फिर यह सोच लिया गया था कि शुतुरमुर्ग की तरह बालू में सिर छिपा लेने से सारा मामला सुलझ जाएगा। अब केंद्र विपक्ष को संदेश दे रहा है कि वैक्सीन पर भ्रम न फैलायें और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ न करें. यह सीख तब दी जा रही है जब देश में कोरोना संक्रमण की वजह से साढ़े तीन लाख लोग जान गंवा चुके हैं।
अब आइये आपको थोड़ा इसके नेपथ्य में ले चलते हैं। ऐसा नहीं है कि दुनिया की वैक्सीन बाजार में भारत की हिस्सेदारी कम हो। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ें बताते हैं कि दुनिया की वैक्सीन बाजार में अकेले सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की हिस्सेदारी 28 फीसदी थी लेकिन जिस समय कोरोना से जूझने का वक्त था. देश को एक सकारात्मक मैसेज देने का वक्त था. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला का एक बयान आता है कि वैक्सीन को लेकर उन्हें कुछ बड़े लोगों की धमकियां मिल रही हैं। सरकार ने उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये लेकिन अपने देश में रहकर महामारी से निपटने के उपाय करने के बजाय उन्होंने अपना सूटकेस उठाया और परिवार सहित लंदन चले गए। आज तक यह पता ही नहीं चल सका कि धमकियां देने वाले कौन थे और उनके लंदन जाते ही सब कुछ शांत कैसे हो गया। उधर वह लंदन गये और इधर क्या हुआ। लगा ही नहीं राज्य और केंद्र के मध्य कोई सामंजस्य है। राज्य सरकारों ने अपने बड़े-बड़े थैले संभाले और निकल पड़ी ग्लोबल टेंडर के जरिये दुनिया से वैक्सीन मांगने। नतीजा आप सबके सामने है।

वैसे बात निकली है तो एक दिलचस्प बात आपको और बता दूं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक हैं सुरेश जाधव। मई माह में जब कोरोना के मामले कम होने लगे, उसी समय एक समारोह में उनके मुंह से निकल पड़ा कि केंद्र सरकार ने उपलब्ध भंडार पर विचार किये बगैर विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। इसका मतलब तो यही हुआ न कि कंपनी की उत्पादन क्षमता पर विचार किये बगैर ही केंद्र सरकार ने टीकाकरण अभियान की घोषणा कर दी। सुरेश जाधव के इस कथन को लेकर विवाद शुरू हो गया। इस पर कंपनी ने कहा कि यह जाधव का निजी बयान हो सकता है यह कंपनी का बयान नहीं है। कंपनी के अधिकृत प्रवक्ता अदार पूनावाला ही हैं. कोई और नहीं.

अब सवाल यह नहीं है कि जाधव का बयान उनका अपना है या कंपनी का है सवाल तो यह है कि जाधव के बयान में सच्चाई कितनी है लेकिन मामला वहीँ दबा दिया गया. चलिये अब थोड़ा आगे चलते हैं. टीकाकरण को लेकर इधर प्रधानमंत्री का संबोधन हुआ नहीं कि उधर ट्विटर के रणबांकुरे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ट्विटर के सहारे अपने चिर परिचित अंदाज में पूछ बैठे कि जब वैक्सीन मुफ्त होगी तो निजी अस्पताल पैसा क्यों लेंगे? अब इन्हें कौन समझाये कि भैया निजी अस्पताल वाले वैक्सीन खरीदकर लाते हैं. केंद्र सरकार राज्य सरकारों के सरकारी अस्पतालों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराती है. निजी अस्पतालों को राज्य सरकारें फ्री में वैक्सीन नहीं बांट रही है. अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी ने बगैर किसी की राय मशविरा किये यह बयान खुद से जारी किया या जिन लोगों को उन्होंने पे रोल पर रखा है, उन्होंने अपने स्तर से बयान जारी कर दिया. यदि यह बयान खुद राहुल ने दिया है तो देश की जनता को इस कांग्रेसी नेता की अपरिपक्व बुद्धि पर तरस खाना चाहिए और यदि पे रोल पर रखे गये लोगों की ओर से यह बयान आया है तो बेहतर है कि कांग्रेस दफ्तर के लोग ऐसे लोगों को हटा दें जो ट्विटर के जरिये बयान देकर जग हंसाई कराते हैं.
बात निकली है तो आइये अखिलेश यादव की भी बात कर लें. केंद्र और राज्य सरकार से उनकी नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि वह यह तक भूल गये कि वैक्सीन का उत्पादन भाजपा नहीं करती बल्कि वैक्सीन का उत्पादन सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया और भारत बायोटेक कर रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि वह भाजपा का टीका नहीं लगवाएंगे. उस समय तो खैर बात आयी गयी हो गयी लेकिन सोमवार सात जून को जब उनके पिताजी मुलायम सिंह यादव की वैक्सीन लगवाते हुए फोटो सार्वजानिक हो गई तो अब अखिलेश के सामने स्थिति असहज हो गयी क्योंकि मुद्दे को भाजपा नेताओं ने लपक लिया और कहने लगे कि अखिलेश तो कहते थे कि यह भाजपा का टीका है. अब अखिलेश ने यह कहकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की कि उन्होंने तो भाजपा की वैक्सीन का विरोध किया था, भारत सरकार की वैक्सीन का विरोध थोड़े ही किया था. वह तो चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का बहुत सम्मान करते हैं.

मुलायम सिंह यादव फिर एक मंझे हुए चतुर राजनीतिज्ञ निकले. जाहिर है वैक्सीन लगवाने की उनकी फोटो उनकी मंशा से ही वायरल हुई है. यानी नेताजी के समर्थकों के लिए एक मैसेज कि राजनीति अपनी जगह है और टीकाकरण अपनी जगह अर्थात कोरोना महामारी से निपटने के लिए सभी को टीका लगवाना चाहिए. अब सवाल यह उठता है कि क्या अखिलेश और उनकी टीम के लोगों की टीकाकरण कराते हुए वायरल हुई फोटो भी देखने को मिलेगी.

यह अज्ञानता नहीं तो और क्या है कि गांवों में जब सरकारी कर्मचारी टीके के लिए जाते हैं तो कोई तालाब में कूदा पड़ा रहा है. कोई खेतों की तरफ भागा जा रहा है तो कोई घर का दरवाजा ही बंद किये ले रहा है. ऐसे में क्या उन नेताओं को बाहर आकर टीकाकरण नहीं कराना चाहिए जो दलित हितों का ढिंढोरा पीटते हैं. आप सही समझे हम बात कर रहें हैं मायावती की. क्या टीकाकरण कराते हुए उनकी तस्वीर वायरल हुई. या बगैर तस्वीर वायरल किये ही उन्होंने टीका लगवा लिया है. बेहतर होता कि टीकाकरण के बाद वह खुद ही दलितों व अन्य वर्ग के लोगों को प्रेरित करने के लिए बयान भी जारी करती. इसी प्रकार सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने क्या टीकाकरण कराया और बयान जारी किया है. स्वस्थ समाज तो सभी को चाहिए चाहे वह मोदी हों, सोनिया हों, राहुल हों, प्रियंका हों, अखिलेश यादव हों या फिर मायावती. राजनीतिक बयानबाजी और उठापटक तो चलती रहेगी लेकिन एक बार समाज स्वस्थ हो जाए तो हम कोरोना की तीसरी लहर से भी निपट लेंगे.

 

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