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आईआईएम कलकत्ता की निदेशक अंजू सेठ ने दिया इस्तीफा, बोर्ड अध्यक्ष पर लगाया आरोप

Shikha Awasthi 23-03-2021 14:29:26 37 Total visiter


कोलकाता। आईआईएम-कलकत्ता के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा पावर्स खत्म किए जाने के एक महीने बाद संस्थान की पहली महिला निदेशक अंजू सेठ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जहां अंजू सेठ ने बोर्ड अध्यक्ष पर पावर्स का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है तो वहीं बोर्ड ने अंजू सेठ पर अनुचित आचरण करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि उनका कार्यकाल एक साल बाद फरवरी 2022 को पूरा होने वाला था। गौरतलब है कि अंजू सेठ ने अपना इस्तीफा सिक लीव लेने के दो दिन के अंदर ही सरकार को सौंप दिया। उन्होने लीव पर जाने के साथ ही प्रशांत मिश्रा, डीन को आईआईएम कलकत्ता के कार्यवाहक निदेशक की जिम्मेदारी दी थी।

वहीं अंजू सेठ ने उनके और बोर्ड के अध्यक्ष श्रीकृष्ण कुलकर्णी के बीच "विश्वास के टूटने" का हवाला दिया है। बता दें कि अंजू सेठ और बोर्ड के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाने का दौर पिछले साल ही शुरू हुआ था। अंजू सेठ द्वारा बोर्ड के अध्यक्ष श्रीकृष्ण कुलकर्णी पर एग्जीक्यूटिव पावर्स को नियंत्रित करने का आरोप लगाया गया था। इसके साथ ही उन्होंने कुलकर्णी पर अपने अधिकारों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया था। अंजू सेठ ने ये भी शिकायत की थी कि उनके काम में अनुचित हस्तक्षेप किया जाता है।

गौरतलब है कि अंजू सेठ को साल 2018 के नवंबर महीने में आईआईएम कलकत्ता की पहली महिला निदेशक के पद पर नियुक्ति किया गया था। वह आईआईएम कलकत्ता 1978 बैच की पूर्व छात्रा भी रही हैं। वहीं एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान अंजू सेठ ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि, "मैं निराश हूं क्योंकि मैं एक सपने को आंशिक रूप से पूरा करके छोड़ रही हूं, यह वह नहीं है जो मैंने मांगा था. फिर भी मुझे गर्व है कि मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैंने उन पारंपरिक बाधाओं को दूर किया जो आईआईएम कलकत्ता के लिए एक विश्वस्तरीय संस्था के रूप में उभरने के अवसर को रोक रही थीं।

वहीं उन्होंने कहा कि, "मुझे उम्मीद है कि भविष्य में, संस्थान कोर मूल्यों के रूप में पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति पर निर्माण करना जारी रखेगा। मुझे कई समर्पित और प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है और मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं। मैं आईआईएम कलकत्ता की एक गौरवशाली एलुमनी बनकर हमेशा रहूंगी।"

 

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