जानिए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर के बारे में

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लखनऊ। 16 जून 1968 में बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्में अमिताभ ठाकुर यूपी कैडर से 1992 बैच के IPS ऑफिसर हैं। साल 2007 में कैट परीक्षा पास करने के बाद उन्हें इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट लखनऊ से प्रवेश के लिये भी आमंत्रित किया गया था। लेकिन उन्हें राज्य सरकार की ओर से अध्ययन अवकाश न मिलने के कारण वह आईआईएम में प्रवेश नहीं ले सके। ठाकुर आर.टी.आई फोरम के संस्थापक हैं। इनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर एक जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

अमिताभ ठाकुर का जीवन विवादों से घिरा रहा है। तमाम मुद्दों पर उन्होंने मीडिया के सामने बेबाक टिप्पणी की है। कुछ महीने पूर्व उन्होंने पुलिस द्वारा दिए जाने वाले ‘गॉर्ड ऑफ ऑनर’ पर भी टिप्पणी की थी और उसे समाप्त करने की मांग की थी। खबरों के अनुसार अमिताभ ठाकुर ने तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन को भेजे पत्र में कहा था कि, “कुछ मंत्री निश्चित तौर पर आपराधिक पृष्ठभूमि के होते हैं। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देने से पुलिस बल का मनोबल गिरेगा और जनता को गलत संदेश जाएगा।”

यही नहीं अमिताभ ठाकुर ने तो खेल को भी नहीं छोड़ा, बीसीसीआई द्वारा राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए की गई संस्तुतियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उनके मुताबिक, केवल राष्ट्रीय खेल संघ ही इन खेल पुरस्कारों के लिए संस्तुति भेज सकते हैं। खेल और युवा मामले के मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त 51 खेल संघों में बीसीसीआई नहीं आता है। वह गैर-मान्यताप्राप्त पूरी तरह निजी खेल संघ है जो मान्यता प्राप्त नहीं बनना चाहता, पर मान्यता प्राप्त खेल संघ की सारी सुविधाएं चाहता है। इसलिए उसे इन पुरस्कारों के लिए संस्तुति करने का अधिकार नहीं है।

उनका नाम यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के साथ उस समय चर्चा में आया था। जब मुलायम का एक धमकी भरा ऑडियो वायरल हुआ था। इस ऑडियों में मुलायम सिंह आईपीएस अमिताभ ठाकुर को धमकाते हुए देख लेने की बात कह रहे थे। अमिताभ पर पूर्व सीएम मुलायम के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराने का आरोप लगा था। उनका कहना था कि मुलायम सिंह ने यह धमकी 10 जुलाई, 2015 को अमिताभ के मोबाइल पर दी थी।

इसके अलावा अमिताभ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई थी। उनपर आरोप लगा था कि उन्होंने 16 नवंबर 1993 को जब आईपीएस की सेवा शुरू की थी, उस समय अपनी संपत्ति का ब्योरा शासन को नहीं दिया था। उसके बाद उन्होंने 1993 से 1999 तक का संपत्ति विवरण शासन को एक साथ दिया था।

खबरों के अनुसार, अमिताभ ठाकुर पर आय से अधिक संपत्ति का भी आरोप लगा था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी व बच्चों के नाम से चल एवं अचल संपत्तियां, बैंक व पीपीएफ जमा की हैं, जिसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी थी। अमिताभ की आय का मामला कोर्ट तक भी पहुंचा, बाद में उन्हें ड्यूटी से बहाल कर दिया गया।

बात करें उनके समय से पहले रिटायर होने कि तो गृह मंत्रालय ने अमिताभ ठाकुर को लोकहित में सेवा में बनाए रखे जाने के उपयुक्त न पाते हुए यह फैसला लिया था। इसकी जानकारी अमिताभ ठाकुर ने खुद अपने ट्विटर हैंडल द्वारा दी थी । उनके साथ दो अन्य लोग भी रिटायर किये गये थे।

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