Parenting: बच्चों की आंखें है अमूल्य, ध्यान दें!

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लाइफस्टाइल। पहले यह समझा जाता था कि चश्मे का संबंध उम्र से होता है, और अक्सर हम लोगों को यह कहते हुए सुनते थे की बढ़ती उम्र के साथ चश्मा लग ही जाता है। लेकिन अब आपने भी अपने आस-पास ऐसे बच्चों को जरुर देखा होगा जिन्हें कम उम्र में ही नजर का चश्मा लगा हुआ है। तो बता दें कि इसका ताल्लुक बदलती लाइफस्टाइल से है न कि उम्र से। आज हम आपको ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप आसानी से पता कर सकते हैं कि आपके बच्चे की आँखे स्वस्थ है या नहीं।

बच्चों में सिरदर्द कॉमन चीज नहीं

बच्चों में सिरदर्द कॉमन चीज नहीं है। लेकिन अगर आपका बच्चा लगातार सिरदर्द की शिकायत करता है, या पढ़ाई करते या टीवी देखते वक्त सिरदर्द होने बात करता है तो इसे seriously ले और तुरंत डॉक्टर से चेकअप करवाएं। आमतौर पर नजर कमजोर होने का यह पहला लक्षण है।

हमेशा आंखे मलना सही नहीं

नींद आने पर या आंखों में किसी छोटी-मोटी तकलीफ से कोई भी आंखें मलता है, लेकिन अगर बच्चा दिनभर आंखें मलता है तो यह नजर कमजोर होने कि निशानी भी हो सकती है। इसे नजरअंदाज न करें।

विटामिन ए की कमी से भी कमजोर होती हैं आँखे

अगर आपके बच्चे को उजाले से परेशानी हो या तेज़ रोशनी देखकर वह अपनी पलकों को तेज़ी से झपकाए तो सावधान हो जाएं। इन सारे लक्षणों का कारण विटामिन की कमी हो सकती है। आप तुरंत उसके डाइट में विटामिन ए की मात्रा को बढ़ाएं, इससे पहले कि उसकी आँखों पर चश्मा लग जाए।

आँखों से जुड़ी समस्या को न करें इग्नोर

थोड़ी-थोड़ी देर में सिर घुमाते रहना भी नजर कमजोर होने का एक लक्षण है। अगर बच्चा टीवी देखते समय बीच-बीच में आंखें बंद कर लेता है तो इसे इग्नोर न करें। तुरंत किसी अच्छे Eye Specialist से मिले।

Eye Specialist से ले सलाह

अगर बच्चे को कोई चीज या किताब या टीवी देखने के लिए पास जाकर खड़ा होना पड़ रहा है, तो ये बताता है कि धीरे-धीरे बच्चे की नजर कमजोर हो रही है। उसे डांटने या इस बात को इग्नोर करने की बजाए उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

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