लोगों को आ गयी संजय गांधी के विमान हादसे की याद

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लखनऊ : सीडीएस बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर दुर्घटना ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत की भी याद ताजा कर दी। उस समय भी देश स्तब्ध था और श्रीमती गांधी ने बड़े साहस के साथ पूरी स्थिति का सामना किया था। संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी सक्रिय रूप से राजनीति में आए थे और बाद में श्रीमती इंदिरा गांधी की नृशंस हत्या के बाद देश के प्रधानमंत्री बने।

वह 23 जून 1980 की सुबह थी। संजय गांधी को प्लेन उड़ाने की बहुत उत्सुकता थी। उनको इतनी जल्दी थी कि दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पूर्व इंस्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना के घर पहुंच गए। सक्सेना सफदरगंज हवाई हड्डी के बगल में ही रहते थे संजय गांधी ने उनसे साथ चलने की बात कही। कैप्टन सक्सेना ने कहा कि वह जरा चाय पी ले फिर चलते हैं लेकिन इंदिरा गांधी के छोटे बेटे को तो बस जल्दी से विमान उड़ाने और हवा में गोते लगाने की जल्दी थी।

इसलिए संजय गांधी ने उतना भी इंतजार नहीं किया जितना कि कैप्टन सक्सेना को आराम से चाय पीने में समय लगता। कैप्टन सक्सेना की चाय खत्म होने से पहले ही संजय गांधी विमान में बैठ चुके थे कैप्टन सक्सेना भी उनके साथ विमान के पिट्स में सवार हो गए। बताया जाता है कि पहले तो संजय गांधी ने सामान्य रूप से विमान उड़ाया लेकिन विमान के टेक ऑफ होने के समय लोगों को काला धुआं दिखाई देने लगा। लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि अचानक यह क्या हो गया था। संजय गांधी का विमान दिल्ली के अशोका होटल के पीछे एक पेड़ से टकराकर टुकड़े टुकड़े हो गया था और संजय गांधी की मौत हो गई थी।