समाज में फैली कुरीतियों पर बनी फिल्म ‘अंडमान’ ओटोटी प्लेटफार्म पर हुई रिलीज

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नई दिल्ली। ओटोटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुई फ़िल्म ‘अंडमान’ का मुख्य उदेश्य यह कि हमे कभी भी अपने मुश्किल हालातों से परेशान होकर अपनी जिन्दगी से हार नहीं माननी चाहिए बल्कि उसका डटकर सामना करना चाहिए. इस फ़िल्म मे हमारे देश मे हो रहे भ्रष्टाचार और गरीबो के साथ हो रहे अन्यायों के बारे मे बहुत बारीकियो से दर्शाया गया है. फिल्म में विदेशों से आयी कोरोना महामारी से हमारे देश के ग्रामीण तबके के लोगों को इससे बचने के लिए लड़ते हुए जमीनी हकीकत पर प्रकाश डालने की कोशिश की गयी है.

फ़िल्म की कहानी एक अंडमान गांव की है, जहां अभिमन्यु प्रताप पंचायत सचिव के पद पर नियुक्त है अभिमन्यु एक ऐसे व्यक्ति है जो नियम –कानूनों का पालन करने वाले एक जागरूक नागरिक है. पढने लिखने मे हमेशा अव्वल रहें है ,यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं, लेकिन IAS के इंटरव्यू मे अभिमन्यु फेल हो जाते है घर समाज के ताने से परेशान और निराश होकर आत्महत्या करने की कोशिश करते है लेकिन उनकी जान बच जाती है फिर वह पंचायत सचिव की नौकरी पर नियुक्त हो जाते है.

समाज में फैली कुरीतियों पर बनी फिल्म 'अंडमान' ओटोटी प्लेटफार्म पर हुई रिलीज

जब वह शहर से दूर अंडमान गांव की हालत देखते है तो बहुत ही खराब स्तिथी रहती है यहाँ तक कि गांव मे एक अस्पताल तक नहीं रहता है ,स्कूल है तो महीने मे दो बार खुलता है. गाव की सड़क जर्जर है, इन हालातो को देखते हुए अभिमन्यु मुख्यमंत्री जी को गांव को शहर से जोड़ने के लिए एक पुल बनवाने की चिठ्ठी लिखकर मांग करते है.

समाज में फैली कुरीतियों पर बनी फिल्म 'अंडमान' ओटोटी प्लेटफार्म पर हुई रिलीज

फिल्म में अभिमन्यु मुख्य नायक की भूमिका में नजर आ रहे हैं , जो गांव की तस्वीर को बदलने के प्रयास में लगे हैं . इस बीच देश मे कोरोना वायरस की वजह से प्रधानमंत्री देश भर मे लॉकडाउन लगा देते है अभिमन्यु को शहर से कटे अंडमान गांव मे क्वारंटाइन सेंटर संभालने की जिम्मेदारी मिलती है. बावजूद इसके अभिमन्यु की मुश्किलें कम नहीं होती है अभिमन्यु को सिर्फ गांव की ही मुश्किलों का ही सामना नहीं करना पड़ रहा है बल्कि कोरोना वायरस से पीड़ित लोगो और गांव वालो मे धसे छूत-अछूत ,हिन्दू –मुस्लमान और ऊँच-नीच के सोचो का भी सामना करना पड़ता है।

कुल मिलकर फिल्म में बाहुबलियों और सामाज में फैली कुरीतियों पर आधारित है, जिसमें समाज के ऊँची जातियों के लोग समाज के निम्न तबके के लोगों पर कैसे अत्याचार करते हैं .इनको निर्देशक ने बारीकी से दर्शकों के सामने रखने का प्रयास किया है। फ़िल्म मे कुछ बाते आपको अजीब सी लग सकती हैं.जैसे लोअर मिडिल क्लास पंचायत सचिव आइफोन यूज करते है.फिल्म की एंडिंग में अभिमन्यु को लाख जतन के बाद उनका सपना पूरा होते हुए दिखाया गया है .