सावरकर के बयान पर राजनाथ सिंह को घेरने वालों की जुबान पर लगा ताला

इतिहासकार विक्रम संपत ने प्रस्तुत किये साक्ष्य

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नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की सावरकर और महात्मा गांधी के बारे में दिए गए बयान के बाद हुए चौतरफा हमले को इतिहासकार विक्रम संपत ने साक्ष्य प्रस्तुत कर लोगों की जुबान बंद कर दी है. उन्होंने पुस्तक के उन पंक्तियों को भी साझा किया है, जिसमें यह स्पष्ट है कि महात्मा गांधी ने सावरकर को दया याचिका दाखिल करने के लिए कहा था. संपत ने रक्षा मंत्री के बयान पर उठाए जा रहे सवालों का सबूत के साथ जवाब दिया है.

गांधी सेवाग्राम आश्रम की वेबसाइट पर महात्मा गांधी के कामों के बारे में दी गई जानकारी के कलेक्शन में गांधी के उस लेटर का जिक्र है जो उन्होंने सावरकर को लिखा था. महात्मा गांधी का यह पत्र ‘कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी’ के वॉल्यूम 19 के पेज नंबर 348 पर मौजूद है.

इस पत्र में महात्मा गांधी ने सावरकर को लिखा, ‘प्रिय सावरकर, मेरे पास आपका पत्र है. आपको सलाह देना मुश्किल है. हालांकि, मेरा सुझाव है कि आप मामले के तथ्यों को स्पष्ट करते हुए एक संक्षिप्त याचिका तैयार करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आपके भाई द्वारा किया गया अपराध विशुद्ध रूप से राजनीतिक था. मैं यह सुझाव इसलिए दे रहा हूं ताकि मामले पर जनता का ध्यान केंद्रित किया जा सके. इस बीच जैसा कि मैंने आपको पहले के एक पत्र में कहा है, मैं इस मामले में अपने तरीके से आगे बढ़ रहा हूं.’

इसके बाद महात्मा गांधी ने इस मामले को मुद्दा बनाने के लिए ‘यंग इंडिया’ में 26 मई 1920 को एक लेख लिखा था. इतिहासकार विक्रम संपत का कहना है कि जब गांधी के पत्र का हिस्सा पहले से मजूद है तो फिर राजनाथ सिंह के इस बयान पर इतना शोर क्यों है. उन्होंने ट्वीट में सारे साक्ष्यों को रखते हुए लिखा, ‘मुझे आशा है कि आप यह नहीं कहेंगे कि गांधी आश्रम ने इन पत्रों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है.’

जानें क्या कहा था रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ?

एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि महात्मा गांधी के कहने पर ही जेल में बंद सावरकर ने अंग्रेजों को दया याचिका के लिए लिखा था. उन्होंने कहा कि सावरकर को लेकर अलग-अलग तरह के झूठ फैलाए गए. कहा गया कि सावरकर ने अंग्रेजों के सामने दया के लिए कई बार याचिका दाखिल की थी. लेकिन सच ये है कि सावरकर ने महात्मा गांधी के कहने पर दया याचिका दाखिल की थी.

रक्षा मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि मार्क्सवादी और लेनिनवादी विचारधारा को मानने वाले लोगों ने वीर सावरकर को फासीवादी बताकर प्रचारित किया, जबकि वो एक स्वतंत्रता सेनानी थे. राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सावरकर को दिखाई जा रही नफरत बिलकुल तथ्यहीन है. रक्षा मंत्री ने सावरकर को भारत का पहला रक्षा विशेषज्ञ बताते हुए कहा कि वो इस बात की बेहतर जानकारी रखते थे कि दूसरे देशों के साथ कैसे संबध रखे जाएं.

बहरहाल केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सावरकर को लेकर दिए गए बयान पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब सावरकर जेल में बंद थे तो उन्होंने महात्मा गांधी से बात कैसे की? इसके साथ यह भी कहा, ‘उस समय महात्मा गांधी कहां थे? सावरकर कहां थे? सावरकर जेल में थे। दोनों ने कैसे बात की? सावरकर ने जेल में रहते हुए दया याचिका दी थी और ब्रिटिशर का साथ देते रहे। इतना ही नहीं 1925 में जेल से बाहर आने पर द्विराष्ट्र के बारे में बात करने वाले वह पहले शख्स थे।’ फ़िलहाल इतिहासकार विक्रम संपत ने साक्ष्य प्रस्तुत कर सबकी बोलती बंद कर दी है।